राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने बुधवार को कहा कि उनकी सरकार मानव केंद्रित विकास पर बल दे रही है और हर नागरिक की गरिमा को सर्वोपरि मानते हुए बिजली,सड़क जैसी बुनियादी सुविधाएं उन आदिवासी बस्तियों तक पहुंचायी है जिनकी अब तक सुध नहीं ली गयी थी ।
श्रीमती मुर्मु ने संसद के बजट सत्र के पहले दिन दोनों सदनों की संयुक्त बैठक को संबोधित करते हुये कहा, ‘‘मेरी सरकार ने उनकी भी सुध ली है, जो अब तक विकास की धारा से दूर रहे हैं। ऐसे हजारों आदिवासी गांव हैं जहां बीते 10 वर्षों में पहली बार बिजली और सड़क पहुंची है।”
उन्होंने कहा, ‘हमारे यहां लंबे समय तक सिर्फ अधिकारों पर चर्चा होती थी। हमने सरकार के कर्तव्यों पर भी बल दिया। इससे नागरिकों में भी कर्तव्य-भाव जागा। यही सामाजिक न्याय की हमारी अवधारणा है और भारत के संविधान के हर अनुच्छेद का संदेश भी यही है।आज अपने-अपने कर्तव्य के पालन से हर अधिकार की गारंटी का भाव जागृत हुआ है।’
उन्होंने कहा कि लाखों आदिवासी परिवारों को अब जाकर नल से शुद्ध पानी मिलना शुरू हुआ है। विशेष अभियान के तहत सरकार, हजारों आदिवासी बहुल गांवों में 4जी इंटरनेट सुविधा भी पहुंचा रही है। वन-धन केंद्रों की स्थापना और 90 से ज्यादा वन-उपज पर न्यूनतम समर्थन मूल्य दिये जाने से आदिवासियों को बहुत लाभ हुआ है।
राष्ट्रपति ने कहा, ‘‘मेरी सरकार ने पहली बार, जनजातियों में भी सबसे पिछड़ी जनजातियों की सुध ली है। उनके लिये लगभग 24 हज़ार करोड़ रुपये की पीएम जनमन योजना बनायी है। आदिवासी परिवारों की अनेक पीढ़ियां सिकल सेल अनीमिया से पीड़ित रही हैं। पहली बार इसके लिये राष्ट्रीय मिशन शुरू किया गया है। अब तक लगभग एक करोड़ 40 लाख लोगों की जांच की जा चुकी है।” उन्होंने कहा, ‘‘दिव्यांगजनों के लिये भी मेरी सरकार ने सुगम्य भारत अभियान चलाया है। साथ ही, भारतीय सांकेतिक भाषा में पाठ्य पुस्तकें उपलब्ध कराई हैं।”
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