स्विट्जरलैंड में एक साक्षात्कार में पोप फ्रांसिस ने यूक्रेन-रूस संघर्ष पर प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि यूक्रेन सरकार को रूस के साथ बातचीत के माध्यम से चल रहे विवाद को खत्म करने के लिए साहस जुटाना चाहिए। पोप से जब यूक्रेन में जारी लोगों के बीच आत्मसमर्पण और सफेद झंडे को लेकर चल रहे चर्चा के बारे में सवाल किया गया तो उन्होंने कहा, “यह केवल एक व्याख्या है। लेकिन मुझे लगता है कि सबसे मजबूत वह है जो स्थिति को देखता है। जो लोगों के बारे में सोचता है और सफेद झंडे का साहस रखता है और वह जो बातचीत करता है।”
उन्होंने आगे कहा, “जब आप देखते हैं कि आप हार गए हैं, चीजें ठीक नहीं चल रही है तो आपको बातचीत करने का साहस रखना होगा। बातचीत कभी भी आत्मसमर्पण करने के बारे में नहीं है, बल्कि देश को बचाने के बारे में है।” पोप फ्रांसिस ने कहा, “आपको शर्म आ सकती है, लेकिन आखिरकार कितनी मौंते हुई है। सही समय पर बातचीत करें और मध्यस्थता के लिए अन्य देशों की मदद लें।” बता दें कि रूस और यूक्रेन के बीच जारी संघर्ष को तीन साल हो चुके हैं और कई देश अब इस युद्ध को समाप्त करने में मदद करने के लिए तैयार है।
यूक्रेन और उनके पश्चिमी समर्थकों ने इस बात पर जोर दिया कि शांति समझौता केवल कीव की शर्तों पर ही हासिल किया जाना चाहिए। उन्होंने यूक्रेन को हथियार पहुंचाना जारी रखने की कसम खाई है। इस बीच रूस ने बताया कि किसी भी विदेशी सहायता से इस युद्ध का रुख बदल नहीं सकता है।बता दें कि मॉस्को और कीव के बीच 2022 में शांति वार्ता टूट गई थी। दोनों देश एक-दूसरे के सामने अवास्तविक मांग रखने के आरोप लगाए थे। रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने बाद में कहा कि मार्च 2022 में इस्तांबुल में वार्ता के दौरान यूक्रेनी प्रतिनिधिमंडल रूस की कुछ शर्तों पर सहमत हुए थे, लेकिन फिर बाद में समझौते से पीछे हट गए थे।
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