जयपुर, राजस्थान के एक मंत्री ने कोटा में छात्रों के आत्महत्या बढ़ते मामलों पर चिंता जताते हुए सोमवार को कहा कि वित्तीय बोझ छात्रों में तनाव के कारणों में से एक है और केंद्र को एक नीति बनानी चाहिए ताकि अभिभावकों को अपने बच्चों की कोचिंग आदि के लिए कर्ज न लेना पड़े।
जलदाय मंत्री महेश जोशी ने जयपुर में संवाददाताओं से कहा, ”पढ़ाई का दबाव है। इसके अलावा, कई छात्रों पर यह दबाव होता है कि उनके माता-पिता ने उनकी पढ़ाई के लिए पैसे उधार लिए हैं और अगर वे कामयाब नहीं हुए तो उनके माता-पिता का क्या होगा।” उन्होंने कहा कि छात्र घर और माता-पिता से दूर रहते हैं और ऐसे सभी कारकों से तनाव व दबाव पैदा होता है जिसके चलते उनके द्वारा आत्महत्या जैसे कदम उठाए जाते हैं।
जोशी ने कहा कि केंद्र सरकार को कोचिंग संस्थानों को लेकर एक नीति बनानी चाहिए और ऐसी व्यवस्था होनी चाहिए जिसमें अभिभावकों को कर्ज लेने की जरूरत न पड़े क्योंकि छात्रों पर दबाव का एक बड़ा कारण है।संयुक्त प्रवेश परीक्षा (जेईई) और मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश की राष्ट्रीय पात्रता-सह-प्रवेश परीक्षा (एनईईटी) जैसी प्रतिस्पर्धी परीक्षाओं की तैयारी के लिए सालाना दो लाख से अधिक छात्र कोटा शहर जाते हैं।
शहर में रविवार को चार घंटे के भीतर दो छात्रों ने अपनी जीवन लीला समाप्त कर ली।अधिकारियों के अनुसार कोटा जिले में 2023 में अब तक प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे 22 छात्रों ने आत्महत्या की है। यह किसी भी साल का अब तक का सबसे बड़ा आंकड़ा है। पिछले साल इस प्रकार के 15 मामले सामने आए थे।
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