महंगाई खासकर खाद्य पदार्थों की कीमतों में आया उछाल इस देश में हमेशा से चुनावी मुद्दा रहा है। जनता पार्टी की सरकार के दौरान प्याज की बेतहाशा बढ़ती कीमत के खिलाफ इंदिरा गांधी ने जनमत तैयार करने के लिए प्याज की माला पहनकर घूमना शुरू कर दिया था। 1980 के लोक सभा चुनाव में इंदिरा गांधी ने इसे बड़ा मुद्दा बनाया और चुनाव जीत कर प्रधानमंत्री बनी।
1998 में अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार द्वारा पोखरण में परमाणु परीक्षण करने से बने माहौल के बावजूद प्याज की बढ़ती कीमतों के कारण भाजपा को दिल्ली विधान सभा चुनाव में हार का सामना करना पड़ा और भाजपा इसके बाद आज तक दिल्ली विधान सभा का चुनाव जीत नहीं पाई है।
यही वजह है कि भाजपा ने महंगाई के मसले पर विपक्षी दलों की रणनीति का काट तैयार करना शुरू कर दिया है। भाजपा के एक नेता ने बताया कि विपक्षी दल महंगाई को लेकर जो दुष्प्रचार करने का प्रयास कर रहा है, उसका जवाब आने वाले दिनों में भाजपा के नेता हर मंच से देंगे और विपक्षी दल खासकर कांग्रेस की पोल खोलेंगे।
आपको याद दिला दें कि केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी कई बार संसद के अंदर और बाहर पेट्रोल-डीजल की ज्यादा कीमत का ठीकरा कांग्रेस पर फोड़ते हुए यह कह चुके हैं कि कांग्रेस की सरकार द्वारा जारी किए गए तेल बांड का भुगतान करने के कारण पेट्रोलियम कंपनियां काफी दबाव में है। वे यहां तक कह चुके हैं कि भाजपा शासित राज्यों ने पेट्रोल-डीजल पर वैट और अन्य तरह के टैक्स कम कर जनता को राहत दी है लेकिन कांग्रेस और अन्य विपक्षी शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने अपने-अपने राज्यों में जनता को कोई राहत नहीं दी है।
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