इजरायल और ईरान के बीच तनाव अब खतरनाक मोड़ पर पहुंच चुका है। दोनों देशों के बीच चल रही यह लड़ाई अब सिर्फ सैन्य टकराव नहीं रह गई, बल्कि रणनीतिक और राजनीतिक स्तर पर भी बेहद गंभीर होती जा रही है। जहां ईरान ने मिसाइलों से इजरायली शहरों को निशाना बनाया है, वहीं इजरायल ने ईरान के परमाणु ठिकानों और राजधानी तेहरान में हमले तेज कर दिए हैं।
अब एक चौंकाने वाला बयान सामने आया है। इजरायल के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा है कि अब युद्ध का दायरा इतना बढ़ सकता है कि ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामेनेई तक को भी निशाना बनाया जा सकता है।
🎯 क्या खामेनेई इजरायल के रडार पर हैं?
‘द वॉल स्ट्रीट जर्नल’ को दिए इंटरव्यू में इजरायली अधिकारी ने कहा, “ईरान के सर्वोच्च नेता की हत्या अब अकल्पनीय नहीं है।” यह बयान वैश्विक स्तर पर हलचल मचा रहा है क्योंकि यह साफ संकेत है कि इजरायल अब ईरान की सत्ता संरचना को भी चुनौती देने की योजना बना रहा है। यह एक बेहद आक्रामक रणनीति का संकेत है, जिसमें सैन्य और राजनीतिक नेतृत्व दोनों को निशाना बनाने की बात की जा रही है।
🔥 ईरान का जवाबी हमला और ‘ऑपरेशन ट्रू प्रॉमिस III’
ईरान ने भी पीछे हटने का कोई संकेत नहीं दिया है। उसने ‘ऑपरेशन ट्रू प्रॉमिस III’ के तहत सैकड़ों मिसाइलें इजरायल के प्रमुख शहरों पर दागी हैं, जिनमें तेल अवीव को विशेष रूप से निशाना बनाया गया। कई मिसाइलें इजरायल की आयरन डोम रक्षा प्रणाली को भेदने में कामयाब रहीं और गंभीर नुकसान हुआ।
वहीं इजरायल के लड़ाकू विमान लगातार तेहरान और अन्य सैन्य ठिकानों पर हमले कर रहे हैं। इजरायली सेना ने ईरान के नतांज यूरेनियम संवर्धन केंद्र समेत कई उच्चस्तरीय ठिकानों को नुकसान पहुंचाने का दावा किया है।
🌐 पूरी दुनिया चिंतित, टारगेटेड किलिंग और न्यूक्लियर जोखिम पर नजर
ईरान और इजरायल की यह सीधी भिड़ंत अब वैश्विक चिंता का विषय बन चुकी है।
एक तरफ जहां राजनीतिक हत्याओं की संभावनाएं चिंता बढ़ा रही हैं,
वहीं दूसरी ओर परमाणु सुविधाओं की सुरक्षा पर भी गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
इजरायल की ओर से यह दावा किया जा रहा है कि उसने ईरान की क्षमताओं को कमजोर कर दिया है, लेकिन हालात यह इशारा कर रहे हैं कि यह संघर्ष अब रुकने वाला नहीं, बल्कि और भड़क सकता है।
🧨 टकराव की दिशा: राजनीतिक बदलाव या व्यापक युद्ध?
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर इजरायल सच में खामेनेई जैसे बड़े राजनीतिक चेहरे को निशाना बनाता है, तो यह सिर्फ एक युद्ध नहीं, बल्कि मिडिल ईस्ट के राजनीतिक समीकरण को पूरी तरह बदलने वाला कदम होगा। दोनों देशों के इस टकराव से पूरे क्षेत्र में व्यापक युद्ध की आशंका गहराती जा रही है।
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