दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) ने ग्रेजुएशन स्तर के सभी कोर्सों की अवधि 3 साल से बढ़ाकर 4 साल करने का फैसला किया है। इसके साथ ही छात्रों को बीच में पढ़ाई छोड़ने और फिर वापस कोर्स ज्वाइन करने के कई मौके दिए जाएंगे। यह जानकारी शुक्रवार को डीयू की कार्यकारी परिषद (ईसी) की 1275वीं बैठक में रजिस्ट्रार डॉ. विकास गुप्ता ने दी।
ऑपरेशन सिंदूर को डीयू का समर्थन
डीयू की यह महत्वपूर्ण बैठक 23 मई को कुलपति प्रो. योगेश सिंह की अध्यक्षता में हुई। बैठक की शुरुआत में पहलगाम आतंकी हमले में मारे गए लोगों को श्रद्धांजलि दी गई। कुलपति ने कहा कि भारत सरकार का ऑपरेशन सिंदूर आतंकवाद को पूरी तरह खत्म करने का प्रयास है, और डीयू इस मिशन को हर संभव समर्थन देगा। इस प्रस्ताव को सर्वसम्मति से स्वीकार किया गया।
पढ़ाई बीच में छोड़ने पर मिलेगा सर्टिफिकेट और डिग्री
रजिस्ट्रार डॉ. विकास गुप्ता ने बताया कि नई शिक्षा नीति 2020 के तहत यूजी कोर्स की अवधि अब 4 साल हो गई है। इसके तहत अगर कोई छात्र बीच में पढ़ाई छोड़ता है तो उसे सर्टिफिकेट या डिग्री मिल सकेगी। छात्रों को बीच में पढ़ाई छोड़ने और बाद में वापसी करने के कई अवसर मिलेंगे, जिससे उनकी पढ़ाई बेकार नहीं होगी।
डीयू को 10 वर्षों में मात्र 10% ही लौटाना होगा हिफा लोन
शून्यकाल में कुलपति प्रो. योगेश सिंह ने बताया कि डीयू को हिफा लोन की राशि में से मात्र 10% ही 10 साल में लौटानी होगी। इस योजना से डीयू के नए भवन और बेहतर सुविधाएं विकसित हो रही हैं, जिससे छात्रों को आधुनिक माहौल मिलेगा।
डीयू कर्मचारियों को भी बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं
कुलपति ने बताया कि दिल्ली रेलवे अस्पताल के साथ डीयू ने एमओयू किया है, जिससे डीयू के कर्मचारी सीजीएचएस रेट पर इलाज की सुविधा प्राप्त कर रहे हैं। इस सेवा का कई कर्मचारी लाभ उठा रहे हैं।
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