भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) बैंकिंग प्रणाली को और पारदर्शी बनाने एवं ग्राहकों की सुविधाओं का विस्तार करने की अपनी प्रतिबद्धता की दिशा में एक कदम और बढ़ाते हुए बैंकों या ऋण संस्थाओं को कर्ज लेने वाले ग्राहकों के ऋण की सूचना अब प्रत्येक पंद्रह दिन या उससे भी कम अंतराल पर देने का निर्देश दिया है।
आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास ने गुरुवार को मौद्रिक नीति समिति की तीन दिवसीय बैठक के बाद चालू वित्त वर्ष की तीसरी द्विमासिक मौद्रिक नीति की घोषणा करते हुए कहा कि वर्तमान में ऋण संस्थाओं (सीआई) को अपने उधार लेने वाले ग्राहकों के ऋण की सूचना मासिक या ऐसे छोटे अंतराल पर ऋण सूचना कंपनियों (सीआईसी) देना आवश्यक है। उधार लेने वाले की ऋणग्रस्तता की अधिक अद्यतन तस्वीर प्रदान करने के उद्देश्य से सीआईसी को ऋण सूचना की रिपोर्टिंग की फ्रीक्वेंसी को मासिक से बढ़ाकर प्रत्येक पंद्रह दिन के आधार पर या ऐसे छोटे अंतराल पर करने का निर्णय लिया गया है।
दास ने कहा कि पाक्षिक रिपोर्टिंग यह सुनिश्चित करेगी कि सीआईसी द्वारा प्रदान की गई ऋण सूचना रिपोर्ट में अधिक नवीनतम जानकारी हो। यह ऋण लेने वालों और ऋण देने वालों (सीआई) दोनों के लिए लाभदायक होगा। उधार लेने वालों को सूचना के तेजी से अपडेट होने का लाभ मिलेगा, खासकर तब जब उन्होंने ऋण चुका दिया हो। ऋण देने वाले संस्थान कर्ज लेने वालों का बेहतर जोखिम मूल्यांकन करने में सक्षम होंगे। साथ ही उधारकर्ताओं द्वारा अधिक ऋण लेने के जोखिम को भी कम कर सकेंगे। इस संबंध में आवश्यक निर्देश जल्द ही जारी किए जाएंगे।
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