ब्रेस्टफीडिंग के दौरान मां की डाइट का सीधा असर बच्चे की सेहत पर पड़ता है। मां जो खाती है, वही पोषण बच्चे को दूध के जरिए मिलता है। इसलिए इस समय संतुलित और पौष्टिक आहार लेना बेहद जरूरी होता है, ताकि बच्चा मजबूत बने और मां की सेहत भी बनी रहे।
ब्रेस्टफीडिंग के दौरान सही डाइट क्यों जरूरी है?
- बच्चे की ग्रोथ और इम्युनिटी मजबूत होती है
- मां को कमजोरी और थकान से बचाव मिलता है
- दूध की क्वालिटी और मात्रा बेहतर होती है
- संक्रमण का खतरा कम होता है
ब्रेस्टफीड कराने वाली मांएं क्या-क्या खाएं?
1. हरी पत्तेदार सब्जियां
पालक, मेथी, सरसों जैसी सब्जियां आयरन, कैल्शियम और फाइबर से भरपूर होती हैं।
फायदा: खून की कमी दूर होती है और दूध की क्वालिटी सुधरती है।
2. दूध और डेयरी प्रोडक्ट
दूध, दही, पनीर और छाछ कैल्शियम और प्रोटीन का अच्छा स्रोत हैं।
फायदा: बच्चे की हड्डियां मजबूत बनती हैं।
3. दालें और प्रोटीन युक्त फूड
मूंग दाल, मसूर दाल, चना, राजमा और अंडा (अगर खाती हैं) प्रोटीन देते हैं।
फायदा: बच्चे की मसल्स और टिश्यू डेवलपमेंट में मदद।
4. ड्राई फ्रूट्स और बीज
बादाम, अखरोट, किशमिश, तिल और अलसी बेहद फायदेमंद हैं।
फायदा: एनर्जी मिलती है और दूध पौष्टिक बनता है।
5. फल
सेब, केला, अनार, संतरा, पपीता और आम जैसे फल विटामिन और मिनरल्स देते हैं।
फायदा: इम्युनिटी बढ़ती है और पाचन ठीक रहता है।
6. साबुत अनाज
गेहूं की रोटी, दलिया, ब्राउन राइस और ओट्स लें।
फायदा: शरीर को लगातार ऊर्जा मिलती रहती है।
7. पर्याप्त पानी और तरल पदार्थ
पानी, नारियल पानी, सूप और छाछ जरूर लें।
फायदा: दूध बनने की प्रक्रिया बेहतर होती है और डिहाइड्रेशन नहीं होता।
किन चीजों से दूरी बनाएं?
- ज्यादा तला-भुना और जंक फूड
- बहुत मसालेदार खाना
- ज्यादा चाय और कॉफी
- शराब और सिगरेट
- बहुत ज्यादा मीठी चीजें
ये चीजें बच्चे के पाचन और नींद पर असर डाल सकती हैं।
कितनी बार खाना चाहिए?
- दिन में 5–6 बार थोड़ा-थोड़ा खाना बेहतर
- ज्यादा देर भूखी न रहें
- हर मील में प्रोटीन और सब्जी जरूर शामिल करें
किन बातों का रखें खास ध्यान?
- खाना हमेशा ताजा और साफ हो
- डॉक्टर की सलाह से आयरन और कैल्शियम सप्लीमेंट लें
- ज्यादा कमजोरी, चक्कर या दूध कम बनने पर डॉक्टर से संपर्क करें
ब्रेस्टफीड कराने वाली मां की डाइट जितनी संतुलित और पौष्टिक होगी, बच्चा उतना ही हेल्दी और मजबूत रहेगा। सही खानपान से न सिर्फ बच्चे की ग्रोथ बेहतर होती है, बल्कि मां खुद भी फिट और एनर्जेटिक महसूस करती है। इसलिए इस दौरान खानपान में लापरवाही न करें और हेल्दी फूड को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाएं।
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