RBI MPC से राहत: पॉजिटिव संकेतों पर सेंसेक्स-निफ्टी हरे निशान में बंद

भारतीय इक्विटी बेंचमार्क 6 फरवरी, 2026 को **भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI)** की मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी (MPC) की मीटिंग से मिले पॉजिटिव संकेतों के बीच बढ़त के साथ बंद हुए। **BSE सेंसेक्स** 266.47 अंक या 0.32% बढ़कर **83,580.40** पर बंद हुआ, जबकि **NSE निफ्टी 50** 50.90 अंक या 0.20% चढ़कर **25,693.70** पर खत्म हुआ। यह सेशन उतार-चढ़ाव भरा रहा, जिसमें इंडेक्स ने दिन के निचले स्तरों (सेंसेक्स ~82,925; निफ्टी ~25,492 तक गिरा) से देर से हुई खरीदारी के सपोर्ट से रिकवर किया।

RBI ने रेपो रेट को **5.25%** पर अपरिवर्तित रखा (MPC का सर्वसम्मत वोट) और **न्यूट्रल** रुख बनाए रखा, जो मैनेजेबल महंगाई (FY26 CPI का अनुमान ~2.1%, थोड़ा बढ़ा हुआ) और मजबूत ग्रोथ (FY26 GDP को संशोधित करके 7.4%) के बीच स्थिरता का संकेत देता है। खास बात यह है कि RBI ने H1 FY27 (Q1: 6.9%, Q2: 7.0%; कुल मिलाकर ~7%) के लिए अपने औसत ग्रोथ अनुमान को ऊपर की ओर संशोधित किया, जो सरकारी खर्च, ट्रेड डील (जैसे, US टैरिफ एडजस्टमेंट), और घरेलू गति से मिले पॉजिटिव संकेतों को दर्शाता है।

बाजारों को RBI के उस प्रस्ताव से और बढ़ावा मिला, जिसमें बैंकों को विवेकपूर्ण सुरक्षा उपायों के साथ **रियल एस्टेट इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट (REITs)** को लोन देने की अनुमति दी गई, जिससे रियल एस्टेट और क्रेडिट इकोसिस्टम के लिए लॉन्ग-टर्म फंडिंग की विजिबिलिटी बढ़ी। रुपये में मामूली रिकवरी (कम कॉर्पोरेट डॉलर डिमांड से मदद मिली) ने भी सेंटीमेंट को और बेहतर बनाया।

सेक्टोरल परफॉर्मेंस मिला-जुला रहा: **निफ्टी FMCG** 2.27% बढ़ा (टॉप गेनर, ITC, HUL के नेतृत्व में), **कंज्यूमर ड्यूरेबल्स** 0.96% बढ़ा, और **प्राइवेट बैंक** और **रियल्टी** दोनों में ~0.63% की बढ़त हुई। **निफ्टी IT** सबसे बड़ा लूजर रहा (-1.47%), जबकि **फार्मा** 0.72% नीचे रहा। ब्रॉडर मार्केट में अलग-अलग रुझान दिखे: **निफ्टी मिडकैप 100** 0.02% गिरा, **स्मॉलकैप 100** 0.27% नीचे आया। **बैंक निफ्टी** ने 59,600–59,650 ज़ोन को बचाने के बाद शॉर्ट कवरिंग की वजह से थोड़ी रिकवरी की। अजीत मिश्रा (रेलिगेयर ब्रोकिंग) जैसे एनालिस्ट को उम्मीद है कि अगर निफ्टी 25,400 के ऊपर बना रहता है, तो RBI के स्थिरता संकेतों के बाद रेंज-बाउंड ट्रेडिंग के बीच पॉजिटिव रुझान के साथ कंसोलिडेशन जारी रहेगा।

हफ़्ते का अंत मज़बूत नोट पर हुआ, जिसमें इंडेक्स ने पिछले नुकसान की भरपाई की और पॉलिसी में निरंतरता और डिफेंसिव और घरेलू शेयरों में सेक्टर रोटेशन के समर्थन से जीत का सिलसिला जारी रखा।