नींद में बोलना (Sleep Talking) कई लोगों में आम माना जाता है, लेकिन यह सिर्फ मज़ाक या मनोरंजन की बात नहीं है। डॉक्टरों के अनुसार, यह स्लीप डिसऑर्डर का संकेत हो सकता है और इससे दिनभर की थकान और मानसिक तनाव भी जुड़ा हो सकता है।
नींद में बोलने के कारण:
- तनाव और डिप्रेशन – मानसिक दबाव नींद के दौरान अवचेतन में बोलने का कारण बन सकता है।
- नींद की कमी – पर्याप्त नींद न मिलने से मस्तिष्क की नींद चक्र प्रभावित होता है।
- अन्य नींद संबंधी समस्याएं – जैसे नींद में चलना या खर्राटे लेना।
- जीन और पारिवारिक इतिहास – कभी-कभी यह आनुवंशिक भी हो सकता है।
दिनभर के असर:
- सुबह थकान और ऊर्जा की कमी
- ध्यान और फोकस में कमी
- मूड स्विंग और डिप्रेशन का खतरा बढ़ना
क्या करें:
- पर्याप्त नींद और सही स्लीप रूटीन अपनाएं।
- तनाव कम करने के लिए ध्यान, योग या हल्की एक्सरसाइज करें।
- जरूरत पड़ने पर नींद विशेषज्ञ या डॉक्टर से सलाह लें।
नींद में बोलना सिर्फ मज़ाक नहीं, बल्कि कभी-कभी यह मानसिक स्वास्थ्य और नींद की गुणवत्ता का संकेत भी हो सकता है। समय पर पहचान और सही उपाय अपनाने से दिनभर की थकान और डिप्रेशन को रोका जा सकता है।
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