स्ट्रोक यानी मस्तिष्क में रक्त का प्रवाह बाधित होना, एक गंभीर स्वास्थ्य समस्या है। विशेषज्ञों के अनुसार, पुरुषों की तुलना में महिलाओं में स्ट्रोक का खतरा अक्सर अधिक होता है, खासकर 50 साल के बाद। यह न केवल जीवन को प्रभावित करता है, बल्कि सही समय पर बचाव न करने पर स्थायी नुकसान भी पहुंचा सकता है।
महिलाओं में स्ट्रोक का खतरा क्यों अधिक है?
- हार्मोनल बदलाव – मेनोपॉज़ के दौरान एस्ट्रोजन हार्मोन में गिरावट होती है, जिससे रक्त वाहिकाओं की लोच कम हो जाती है और ब्लड प्रेशर बढ़ सकता है। यह स्ट्रोक का जोखिम बढ़ाने वाला एक बड़ा कारण है।
- हृदय संबंधी समस्याएं – महिलाओं में हृदय रोग, उच्च ब्लड प्रेशर और कोलेस्ट्रॉल की समस्या स्ट्रोक का खतरा बढ़ा सकती है। हार्ट और मस्तिष्क का सीधा संबंध होने के कारण ब्लॉकेज या थ्रॉम्बस स्ट्रोक का कारण बन सकते हैं।
- गर्भावस्था और प्रसव – गर्भावस्था और प्रसव के दौरान ब्लड क्लॉटिंग की संभावना बढ़ जाती है। यह कुछ महिलाओं में स्ट्रोक का कारण बन सकती है।
- लाइफस्टाइल और तनाव – कम एक्टिविटी, गलत खानपान, अत्यधिक तनाव और नींद की कमी महिलाओं में स्ट्रोक के जोखिम को बढ़ाते हैं।
बचाव के आसान उपाय
- स्वस्थ खानपान अपनाएं – हरी सब्जियां, फल, साबुत अनाज और ओमेगा-3 फैटी एसिड युक्त खाद्य पदार्थों को डाइट में शामिल करें। अधिक तला-भुना और जंक फूड से परहेज करें।
- नियमित एक्सरसाइज करें – रोजाना कम से कम 30 मिनट की हल्की एक्सरसाइज या योग स्ट्रोक के जोखिम को कम कर सकती है।
- ब्लड प्रेशर और शुगर पर नजर रखें – हाई ब्लड प्रेशर और डायबिटीज स्ट्रोक का बड़ा कारण हैं। समय-समय पर जांच और चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है।
- तनाव कम करें – ध्यान, मेडिटेशन और पर्याप्त नींद स्ट्रोक की संभावना को घटाने में मदद करती हैं।
- धूम्रपान और शराब से बचें – ये दोनों आदतें रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुंचाकर स्ट्रोक का खतरा बढ़ाती हैं।
कब तुरंत डॉक्टर से मिलें?
अगर अचानक हाथ-पैर कमजोर महसूस हों, बोलने में दिक्कत हो, सिर में तेज दर्द या संतुलन बिगड़ने जैसे लक्षण दिखें, तो तुरंत आपातकालीन चिकित्सा सहायता लें। समय पर इलाज स्ट्रोक के गंभीर परिणामों को रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
कुल मिलाकर, पुरुषों की तुलना में महिलाओं में स्ट्रोक का खतरा अधिक होने के पीछे हार्मोनल बदलाव, हृदय संबंधी समस्याएं और लाइफस्टाइल कारक मुख्य भूमिका निभाते हैं। सही खानपान, नियमित व्यायाम और स्वास्थ्य पर ध्यान देकर इस गंभीर बीमारी से बचाव संभव है।
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