वरिष्ठ पत्रकार मार्क टुली का निधन, 90 साल की उम्र में दुनिया को कहा अलविदा

24 अक्टूबर, 1935 को टॉलीगंज, कलकत्ता (अब कोलकाता) में एक ब्रिटिश कारोबारी परिवार में जन्मे टुली ने अपने शुरुआती साल भारत में बिताए, जिसमें दार्जिलिंग में बोर्डिंग स्कूल भी शामिल है, जिसके बाद वह नौ साल की उम्र में UK चले गए। उन्होंने कैम्ब्रिज में धर्मशास्त्र की पढ़ाई की और पादरी बनने का इरादा था, लेकिन बाद में पत्रकारिता में आ गए और 1964 में BBC में शामिल हो गए। वह 1965 में BBC संवाददाता के रूप में भारत लौटे, और बाद में दो दशकों से ज़्यादा समय तक (1994 तक) नई दिल्ली ब्यूरो प्रमुख रहे।

उनके कार्यकाल में कई अहम घटनाएँ हुईं: भारत-पाकिस्तान युद्ध, ऑपरेशन ब्लू स्टार (1984), इंदिरा गांधी की हत्या और 1984 के सिख विरोधी दंगे, भोपाल गैस त्रासदी (1984), राजीव गांधी की हत्या (1991), और बाबरी मस्जिद विध्वंस (1992)। उन्होंने BBC के डायरेक्टर जनरल से मतभेद के कारण BBC छोड़ दिया, लेकिन 2019 तक फ्रीलांसिंग करते रहे और BBC में योगदान देते रहे।

टुली ने कई प्रभावशाली किताबें लिखीं: “अमृतसर: मिसेज़ गांधीज़ लास्ट बैटल” (1985, सतीश जैकब के साथ), “नो फुल स्टॉप्स इन इंडिया” (1988), “इंडिया इन स्लो मोशन” (2002, गिलियन राइट के साथ), “इंडियाज़ अनएंडिंग जर्नी” (2008), “इंडिया: द रोड अहेड” (2011), और “द हार्ट ऑफ़ इंडिया” (1995) और “अपकंट्री टेल्स” (2017) जैसी फिक्शन किताबें।

उन्हें मिले सम्मानों में OBE (1985), नाइटहुड (KBE, 2002), और भारत का पद्म भूषण (2005) शामिल हैं। उनके पास ओवरसीज सिटिजनशिप ऑफ़ इंडिया कार्ड था, जो देश के साथ उनके गहरे जुड़ाव को दिखाता था। उनकी सहानुभूति भरी, गहरी रिपोर्टिंग ने उन्हें भारत के सबसे पसंदीदा विदेशी पत्रकारों में से एक बना दिया।