समोसा – यह स्नैक भारतीयों का सबसे पसंदीदा फूड आइटम है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि हाई यूरिक एसिड वाले मरीजों के लिए समोसा खाना सही नहीं हो सकता? मैदे और आलू से बनने वाला यह कुरकुरा स्नैक स्वादिष्ट जरूर है, लेकिन इसके सेवन का असर आपके जॉइंट्स और सेहत पर पड़ सकता है।
आइए जानते हैं क्यों और कैसे।
समोसा क्यों बढ़ा सकता है यूरिक एसिड
- मैदा और तला हुआ खाना
समोसा का बाहरी हिस्सा मैदे का होता है और इसे डीप फ्राई किया जाता है। तला हुआ और प्रोसेस्ड फूड शरीर में सूजन और यूरिक एसिड बढ़ा सकता है, खासकर अगर इसे बार-बार खाया जाए। - अंदर का आलू और मसाले
आलू में प्यूरीन की मात्रा ज्यादा नहीं होती, लेकिन मसालों और तेल के साथ पकाने से यह फूड ब्लड यूरिक एसिड लेवल को प्रभावित कर सकता है। - अत्यधिक कैलोरी और फैट
डीप फ्राइड समोसा कैलोरी में बहुत ज्यादा है। ज्यादा फैट और कैलोरी वजन बढ़ा सकती है, जो यूरिक एसिड के मरीजों के लिए जोखिम बढ़ाता है।
यूरिक एसिड पर असर
- जोड़ों में दर्द और सूजन बढ़ सकती है
- गाउट (Gout) के लक्षण तीव्र हो सकते हैं
- पेट और पाचन पर असर पड़ सकता है
- बार-बार सेवन से ब्लड यूरिक एसिड स्तर बढ़ सकता है
हाई यूरिक एसिड वाले मरीजों के लिए सुझाव
- समोसा कम खाएं
- कभी-कभी treat के तौर पर ही खाएं, रोजाना सेवन न करें।
- बेक्ड समोसा या एयर फ्राय करें
- डीप फ्राई करने की बजाय बेक्ड या एयर फ्राय समोसा बनाएं।
- यह स्वाद में अच्छा और सेहत के लिए कम हानिकारक होता है।
- स्वस्थ स्टफिंग चुनें
- आलू के बजाय मिक्स वेजिटेबल या लो-प्यूरीन विकल्प चुन सकते हैं।
- तेल की क्वालिटी ध्यान रखें
- तले हुए स्नैक्स में रिफाइंड तेल की जगह हेल्दी तेल का इस्तेमाल करें
समोसा स्वाद में लाजवाब जरूर है, लेकिन हाई यूरिक एसिड वाले मरीजों के लिए इसे रोजाना खाने से बचना चाहिए। बार-बार सेवन से जॉइंट्स में दर्द, सूजन और यूरिक एसिड लेवल बढ़ने का खतरा रहता है।
सुझाव: अगर कभी समोसा खाने का मन करे, तो बेक्ड या एयर फ्राय वर्जन चुनें और मात्रा पर नियंत्रण रखें। सेहत और स्वाद दोनों का संतुलन बनाए रखना जरूरी है।
Navyug Sandesh Hindi Newspaper, Latest News, Findings & Fact Check