पाचन और डायबिटीज के लिए बासी रोटी क्यों है वरदान? जानें एक्सपर्ट की राय

अक्सर घर में बची हुई रोटी को फेंक दिया जाता है या कभी-कभी लोग इसे खाने से हिचकिचाते हैं। मगर आयुर्वेद और न्यूट्रिशन एक्सपर्ट्स का मानना है कि बासी रोटी कुछ लोगों के लिए स्वास्थ्य की दृष्टि से फायदेमंद भी हो सकती है।

बासी रोटी और उसके फायदे

बासी रोटी में स्टार्च के टूटने की प्रक्रिया शुरू हो जाती है, जिसे रिजिस्टेंट स्टार्च कहा जाता है। यह स्टार्च शरीर में धीरे-धीरे पचता है और ब्लड शुगर लेवल को नियंत्रित करने में मदद करता है। इसके अलावा बासी रोटी में फाइबर की मात्रा अधिक होती है, जो पेट के लिए लाभकारी है।

फायदे:

डायबिटीज के मरीजों के लिए फायदेमंद – रिजिस्टेंट स्टार्च के कारण ब्लड शुगर तेजी से नहीं बढ़ता।

पाचन सुधारता है – फाइबर की मौजूदगी से आंत की सफाई होती है और कब्ज की समस्या कम होती है।

वज़न कंट्रोल में मदद – बासी रोटी लंबे समय तक पेट भरा रखती है और भूख को नियंत्रित करती है।

गट हेल्थ के लिए लाभकारी – यह प्रोबायोटिक्स का काम करती है और पेट के अच्छे बैक्टीरिया को बढ़ावा देती है।

किन लोगों को खानी चाहिए

डायबिटीज के मरीज – ब्लड शुगर नियंत्रित रखने के लिए बासी रोटी आदर्श है।

वजन घटाने वाले लोग – लंबे समय तक पेट भरा रखने के कारण भूख कम लगती है।

पाचन की समस्या वाले लोग – कब्ज और गैस की समस्या में राहत मिलती है।

हृदय रोग के जोखिम वाले लोग – रिजिस्टेंट स्टार्च और फाइबर कोलेस्ट्रॉल नियंत्रित करने में मदद करते हैं।

बासी रोटी खाने का तरीका

बासी रोटी को हल्का तवा पर सेककर या सूप/सब्जी के साथ खाया जा सकता है।

इसे तेल या घी में ज्यादा न तलें, इससे फाइबर का फायदा कम हो सकता है।

रात की बची हुई रोटी अगले दिन सुबह या दोपहर के भोजन में उपयोग करें।

एक्सपर्ट की राय

डाइटिशियन कहते हैं कि बासी रोटी सिर्फ तब फायदेमंद होती है जब यह साफ और सुरक्षित तरीके से स्टोर की गई हो। गंध या फफूंदी वाली रोटी कभी न खाएं। आयुर्वेदिक दृष्टि से भी बासी रोटी को हल्का पचाने योग्य माना गया है और यह सर्दियों में पेट को गर्म रखने में मदद करती है।

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