राजेश खन्ना का वो दौर जब सुपरस्टार ने लगातार 7 फ्लॉप फिल्में दीं

हिंदी सिनेमा के पहले सुपरस्टार राजेश खन्ना का नाम आते ही आज भी फैंस की आंखों में चमक आ जाती है। 1960 और 70 के दशक में उन्होंने जो लोकप्रियता हासिल की, वैसी दीवानगी किसी और अभिनेता के हिस्से नहीं आई। एक के बाद एक 15 सुपरहिट फिल्मों का रिकॉर्ड बनाने वाले राजेश खन्ना का स्टारडम अपने चरम पर था। लेकिन हर ऊंचाई के बाद एक मोड़ आता है, और यही मोड़ उनके करियर में भी आया।

राजेश खन्ना के जन्मदिन के मौके पर उनके जीवन के उस दौर को याद करना जरूरी है, जब अपार सफलता के बाद उनका करियर मुश्किल दौर में प्रवेश करने लगा। कहा जाता है कि 1970 के दशक के मध्य में उनकी फिल्मों का बॉक्स ऑफिस प्रदर्शन अचानक कमजोर पड़ने लगा। इस दौरान उन्होंने लगातार 7 फ्लॉप फिल्में दीं, जिसने फिल्म इंडस्ट्री को चौंका दिया।

फिल्म विशेषज्ञों के मुताबिक, राजेश खन्ना के बुरे दौर की सबसे बड़ी वजह बदलता दर्शक वर्ग और सिनेमा का नया ट्रेंड था। जहां एक ओर दर्शक रोमांटिक हीरो से आगे बढ़कर एक्शन और यथार्थवादी किरदारों को पसंद करने लगे थे, वहीं दूसरी ओर नए सितारे तेजी से उभर रहे थे। अमिताभ बच्चन जैसे कलाकारों ने ‘एंग्री यंग मैन’ की छवि के साथ दर्शकों का ध्यान खींचा, जिससे सिनेमा का रुख बदल गया।

राजेश खन्ना की जिन फिल्मों ने उस समय निराश किया, उनमें ऐसी कहानियां थीं, जो पुराने फॉर्मूले पर आधारित थीं। दर्शकों को वही रोमांस और इमोशन अब नया नहीं लग रहा था। इसके साथ ही फिल्म चयन को लेकर भी उनसे कुछ चूक हुई, जिसे खुद उन्होंने बाद में इंटरव्यू में स्वीकार किया था।

हालांकि यह कहना गलत होगा कि फ्लॉप फिल्मों ने राजेश खन्ना की लोकप्रियता खत्म कर दी थी। उस दौर में भी उनके चाहने वालों की संख्या कम नहीं हुई। सिनेमाघरों के बाहर आज भी उनके नाम के पोस्टर पर फूल चढ़ते थे और फैंस उन्हें देखने के लिए उमड़ पड़ते थे। फर्क सिर्फ इतना था कि बॉक्स ऑफिस का जादू पहले जैसा नहीं रहा।

बुरे दौर के बावजूद राजेश खन्ना ने हार नहीं मानी। समय के साथ उन्होंने अपने किरदारों में बदलाव किया और सहायक भूमिकाओं में भी अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज कराई। ‘अवतार’, ‘स्वर्ग’ और ‘आग का गोला’ जैसी फिल्मों में उन्होंने साबित किया कि अभिनय की ताकत उम्र या ट्रेंड की मोहताज नहीं होती।

राजेश खन्ना का जीवन इस बात का उदाहरण है कि फिल्मी दुनिया में सफलता स्थायी नहीं होती, लेकिन प्रतिभा हमेशा याद रखी जाती है। फ्लॉप फिल्मों का दौर भी उनके चमकदार करियर का एक हिस्सा रहा, जिसने उन्हें और अधिक परिपक्व कलाकार बनाया।

यह भी पढ़ें:

उस्मान हादी हत्याकांड: भीड़ और मीडिया के बीच तनावपूर्ण हालात