भारतीय घरों में छोटे बच्चों के कान में सरसों, बादाम या नारियल का तेल डालना एक पुरानी घरेलू परंपरा रही है। माना जाता है कि इससे कान साफ रहते हैं, दर्द नहीं होता और कानों में जमा मैल निकल जाता है। लेकिन डॉक्टर और ईएनटी विशेषज्ञ इस आदत को लेकर सतर्क रहने की सलाह देते हैं। सवाल यह है कि क्या सच में बच्चों के कान में तेल डालना सुरक्षित है, या इससे नुकसान हो सकता है?
एक्सपर्ट्स क्या कहते हैं?
ईएनटी विशेषज्ञों के अनुसार, बिना डॉक्टर की सलाह बच्चों के कान में तेल डालना सही नहीं है। खासतौर पर शिशु और छोटे बच्चों के कान बेहद संवेदनशील होते हैं। तेल डालने से कई बार फायदा कम और नुकसान ज्यादा हो सकता है।
कान में तेल डालने से हो सकते हैं ये नुकसान
इंफेक्शन का खतरा
तेल कान के अंदर नमी बनाए रखता है, जिससे बैक्टीरिया और फंगस पनप सकते हैं।
इससे कान में खुजली, दर्द और सूजन हो सकती है।
कान का पर्दा खराब होने का जोखिम
अगर बच्चे के कान का पर्दा पहले से कमजोर या फटा हुआ है, तो तेल डालने से गंभीर समस्या हो सकती है।
कान की मैल (वैक्स) और सख्त हो सकती है
अक्सर माना जाता है कि तेल से वैक्स निकल जाती है, जबकि कई मामलों में तेल मैले को और चिपचिपा बना देता है, जिससे सुनने में दिक्कत हो सकती है।
दर्द और असहजता
बच्चों को कान में भारीपन, जलन या दर्द महसूस हो सकता है, जिससे वे रोने और चिड़चिड़े होने लगते हैं।
कब ठीक हो सकता है तेल डालना?
डॉक्टर बताते हैं कि कुछ विशेष स्थितियों में, केवल डॉक्टर की सलाह पर मेडिकेटेड ईयर ड्रॉप्स या तेल का उपयोग किया जा सकता है, जैसे—
अत्यधिक सूखापन
डॉक्टर द्वारा पुष्टि की गई वैक्स ब्लॉकेज
कान में दर्द की विशेष स्थिति
बच्चों के कान की देखभाल कैसे करें?
बच्चे के कान को बाहर से साफ और सूखा रखें।
रुई की डंडी या नुकीली चीज़ कान में न डालें।
नहाते समय पानी कान में न जाए, इसका ध्यान रखें।
अगर बच्चा बार-बार कान पकड़ता है या दर्द की शिकायत करता है, तो तुरंत ईएनटी डॉक्टर से संपर्क करें।
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