महिलाओं में 40 की उम्र के बाद कई बार बच्चेदानी (Uterus) का खिसकना या प्रोलेप्स की समस्या देखने को मिलती है। यह समस्या शारीरिक कमजोरी, हार्मोनल बदलाव और जीवनशैली से जुड़ी हो सकती है। समय रहते सही उपाय करने से इसके लक्षण कम किए जा सकते हैं और स्वास्थ्य बेहतर रखा जा सकता है।
कारण:
- हार्मोनल बदलाव
40 के बाद एस्ट्रोजन का स्तर कम होने लगता है।
यह यूटेरस और पैल्विक मसल्स को कमजोर कर देता है।
- बार-बार प्रेगनेंसी और डिलीवरी
अधिक बच्चे जन्म देने से पैल्विक फ्लोर की मांसपेशियाँ कमजोर होती हैं।
इससे बच्चेदानी का समर्थन कम हो जाता है।
- भारी वजन उठाना या स्ट्रेनिंग गतिविधियाँ
भारी वजन उठाने या लगातार स्ट्रेनिंग करने से पैल्विक मसल्स पर दबाव बढ़ता है।
यह प्रोलेप्स का कारण बन सकता है।
- मांसपेशियों की कमजोरी
उम्र बढ़ने के साथ पैल्विक फ्लोर की मांसपेशियाँ कमजोर होती हैं।
इससे यूटेरस अपने स्थान से खिसक सकती है।
लक्षण:
निचले पेट या कमर में खिंचाव या दर्द
पेशाब या मल त्यागते समय समस्या
योनि से भारीपन या किसी चीज का बाहर आने जैसा महसूस होना
यौन संबंधों में असुविधा
उपाय:
- किगल एक्सरसाइज (Kegel Exercises)
पैल्विक फ्लोर की मांसपेशियों को मजबूत करने के लिए रोज़ाना किगल एक्सरसाइज करें।
- स्वस्थ वजन बनाए रखें
अधिक वजन पैल्विक मसल्स पर दबाव बढ़ाता है।
संतुलित आहार और हल्की एक्सरसाइज अपनाएं।
- भारी वजन उठाने से बचें
भारी सामान उठाने से बचें और स्ट्रेनिंग गतिविधियों से परहेज करें।
- मेडिकल चेकअप
समय-समय पर महिलाओं को पैल्विक हेल्थ का चेकअप करवाना चाहिए।
डॉक्टर की सलाह पर प्रोजेक्ट्स या सर्जरी की आवश्यकता हो सकती है।
40 की उम्र के बाद बच्चेदानी का खिसकना आम है, लेकिन सही सावधानी और एक्सरसाइज से इसे नियंत्रित किया जा सकता है। समय पर पहचान और उपाय करने से महिलाओं की सेहत और जीवन की गुणवत्ता बनी रहती है।
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