iPhone और Android यूजर्स सावधान! नया स्कैम खाली कर सकता है बैंक अकाउंट

डिजिटल भुगतान और ऑनलाइन बैंकिंग के बढ़ते उपयोग के बीच साइबर अपराधियों ने अब एक नया तरीका अपनाना शुरू कर दिया है, जिससे वे स्मार्टफोन उपयोगकर्ताओं की बैंकिंग जानकारी चुराने की कोशिश कर रहे हैं। हाल ही में अमेरिकी संघीय जांच एजेंसी (FBI) ने इस संबंध में एक गंभीर चेतावनी जारी की है। यह खतरा न केवल एंड्रॉयड बल्कि आईफोन उपयोगकर्ताओं पर भी मंडरा रहा है, क्योंकि स्कैमर्स अब ऐसे तकनीकी हथकंडे अपना रहे हैं जो किसी भी मोबाइल ऑपरेटिंग सिस्टम पर काम कर सकते हैं।

रिपोर्ट के मुताबिक, साइबर अपराधी अब नकली सिस्टम नोटिफिकेशन और पॉप-अप संदेशों का उपयोग कर रहे हैं, जो बिल्कुल स्मार्टफोन की मूल चेतावनियों की तरह दिखाई देते हैं। ये फर्जी अलर्ट फोन में वायरस, सिक्योरिटी एरर या बैंक खाते में किसी संदिग्ध गतिविधि का दावा कर उपयोगकर्ताओं को डराते हैं। इसके बाद उन्हें एक लिंक पर क्लिक करने या किसी तथाकथित ‘सिक्योरिटी हेल्पलाइन’ नंबर पर संपर्क करने के लिए कहा जाता है।

FBI का कहना है कि जैसे ही उपयोगकर्ता उस लिंक पर क्लिक करता है, एक नकली वेबसाइट खुलती है, जो बिल्कुल बैंक या आधिकारिक सेवा प्रदाता की असली साइट जैसी दिखती है। यहां उपयोगकर्ता से लॉगिन आईडी, पासवर्ड, ओटीपी और यहां तक कि क्रेडिट/डेबिट कार्ड की जानकारी भी मांगी जाती है। कई मामलों में स्कैमर्स स्क्रीन शेयरिंग ऐप या रिमोट एक्सेस ऐप इंस्टॉल करवाकर सीधे फोन का नियंत्रण भी हासिल कर लेते हैं। इसके बाद बैंक खातों को खाली करने में उन्हें ज्यादा समय नहीं लगता।

एजेंसी ने यह भी चेताया है कि स्कैमर्स लगातार अपने तरीकों को उन्नत कर रहे हैं। अब वे ऐसे मैलवेयर बना रहे हैं जो स्मार्टफोन की सेटिंग्स को इस तरह परिवर्तित कर देते हैं कि उपयोगकर्ता को असली और नकली नोटिफिकेशन में फर्क ही नहीं पता चलता। साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि यह तकनीक खतरनाक इसलिए है क्योंकि यह उपयोगकर्ताओं की आदतों और विश्वास का लाभ उठाती है। जब स्क्रीन पर कोई चेतावनी आती है, तो अधिकांश लोग स्वाभाविक रूप से उसे गंभीरता से लेते हैं और बिना सोचे-समझे निर्देशों का पालन कर बैठते हैं।

FBI ने उपयोगकर्ताओं से आग्रह किया है कि किसी भी अप्रत्याशित चेतावनी, पॉप-अप, लिंक या फोन कॉल पर तुरंत भरोसा न करें। एजेंसी ने सलाह दी है कि यदि फोन पर सिक्योरिटी अलर्ट आए, तो सीधे संबंधित बैंक या सेवा प्रदाता की आधिकारिक वेबसाइट, मोबाइल ऐप या हेल्पलाइन से ही सत्यापन करें। इसके अलावा, किसी भी स्क्रीन शेयरिंग या रिमोट एक्सेस ऐप को इंस्टॉल न करें, जब तक कि वह पूरी तरह से भरोसेमंद और आवश्यक न हो।

भारतीय साइबर विशेषज्ञों का कहना है कि यह खतरा भारत जैसे देशों में और भी गंभीर है, जहां डिजिटल पेमेंट तेजी से बढ़ रहे हैं और कई उपयोगकर्ता तकनीकी रूप से जागरूक नहीं हैं। विशेषज्ञों ने उपयोगकर्ताओं को फोन में अनधिकृत ऐप्स डाउनलोड न करने, संदिग्ध लिंक न खोलने और नियमित रूप से पासवर्ड बदलने की सलाह दी है।

बढ़ते साइबर खतरों के बीच यह चेतावनी समय पर और महत्वपूर्ण मानी जा रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि जागरूकता ही इस तरह के अपराधों से सुरक्षा की सबसे प्रभावी ढाल है।

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