मिर्गी एक ऐसी न्यूरोलॉजिकल स्थिति है, जिसमें मस्तिष्क की विद्युत गतिविधि अचानक असामान्य हो जाती है और दौरे की स्थिति उत्पन्न होती है। यह बीमारी किसी भी आयु वर्ग में दिखाई दे सकती है और इसके कारण, लक्षण तथा उपचार के तरीके व्यक्ति की स्थिति और बीमारी की गंभीरता पर निर्भर करते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, मिर्गी का समय पर निदान और निरंतर उपचार मरीज की जीवनशैली को सामान्य रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
चिकित्सकों का कहना है कि मिर्गी के दौरे कई कारणों से पड़ सकते हैं। आनुवंशिक कारक, सिर की चोट, मस्तिष्क में संक्रमण, स्ट्रोक, दिमाग में ट्यूमर, जन्म के समय ऑक्सीजन की कमी या मस्तिष्क संबंधी अन्य विकार इसकी प्रमुख वजहों में शामिल हैं। कई मामलों में मिर्गी का सटीक कारण पता नहीं चल पाता, जिसे चिकित्सकीय भाषा में ‘इडियोपैथिक एपिलेप्सी’ कहा जाता है।
डॉक्टर बताते हैं कि मिर्गी का उपचार केवल दवाओं पर निर्भर नहीं होता। सबसे पहले मरीज के दौरे के प्रकार और उसकी आवृत्ति को समझना जरूरी होता है। इसके बाद न्यूरोलॉजिस्ट दवाओं का एक ऐसा संयोजन निर्धारित करते हैं, जिसे नियमित रूप से लेने से दौरे नियंत्रित रह सकें। कई मरीजों में सही दवा और उचित खुराक मिलने पर लंबे समय तक दौरे नहीं आते, जिससे जीवन लगभग सामान्य हो जाता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, मिर्गी के इलाज की अवधि निश्चित नहीं होती। कुछ मरीज एक-दो वर्षों में काफी सुधार महसूस करते हैं, जबकि कुछ मरीजों को लंबे समय तक दवाओं की जरूरत पड़ती है। डॉक्टरों का कहना है कि यदि मरीज दो से पांच वर्ष तक पूरी तरह दौरे-मुक्त रहे, तो चिकित्सक धीरे-धीरे दवा बंद करने पर विचार कर सकते हैं। हालांकि यह प्रक्रिया पूरी तरह डॉक्टर की निगरानी में ही की जानी चाहिए।
चिकित्सक यह भी सलाह देते हैं कि मिर्गी से पीड़ित व्यक्ति को तनाव कम रखना, पर्याप्त नींद लेना और दवाओं को समय पर लेना बेहद जरूरी है। शराब, धूम्रपान और तेज़ चमकती रोशनी कई बार दौरे को ट्रिगर कर सकती है, इसलिए उनसे बचाव की सलाह दी जाती है। कुछ मामलों में, जब दवाओं से सुधार नहीं होता, तब सर्जरी, वेगस नर्व स्टिमुलेशन या डाइट आधारित थेरेपी जैसे विकल्पों पर विचार किया जाता है।
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