भारतीय रसोई में मौजूद कई मसाले केवल स्वाद बढ़ाने का काम ही नहीं करते, बल्कि सेहत के लिए भी महत्वपूर्ण माने जाते हैं। इन्हीं में से काला नमक और हींग दो ऐसे प्राकृतिक तत्व हैं जिनका उपयोग सदियों से पाचन से जुड़ी परेशानियों को कम करने के लिए किया जाता रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि इन दोनों सामग्री का सही मात्रा में और उचित समय पर सेवन करने से शरीर को हल्कापन महसूस होता है और पेट से संबंधित समस्याओं में राहत मिल सकती है। हालांकि यह किसी बीमारी का उपचार नहीं है, बल्कि संतुलित आहार और स्वस्थ जीवनशैली के साथ इसका उपयोग सहायक भूमिका निभा सकता है।
काला नमक में मौजूद खनिज तत्व पाचन एंज़ाइमों को सक्रिय करने में मदद करते हैं। आयुर्वेद में इसे गैस, कब्ज और अपच जैसी समस्याओं में उपयोगी माना गया है। वहीं हींग को एक शक्तिशाली मसाले के रूप में पहचाना जाता है, जो अपने सूक्ष्म गुणों की वजह से पेट फूलना या भारीपन कम करने में सहायक हो सकती है। विशेषज्ञों के अनुसार, इन दोनों का संयोजन भोजन के पाचन को सुचारू रखने में माहिर माना जाता है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं कि सुबह के समय, विशेषकर नाश्ते के पहले, चुटकी भर काला नमक गुनगुने पानी में डालकर पीने से पेट हल्का महसूस हो सकता है। यह तरीका उन लोगों द्वारा अपनाया जाता है जिन्हें अक्सर गैस या ढीला पाचन परेशान करता है। वहीं हींग को परंपरागत रूप से गर्म पानी या सब्ज़ियों के तड़के के साथ लेने की सलाह दी जाती है। ताज़ा भोजन में चुटकी भर हींग मिलाने से पाचन में सहूलियत महसूस की जा सकती है।
कुछ लोग इसे दही या छाछ में काला नमक और हींग दोनों मिलाकर सेवन करना भी उपयोगी मानते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि छाछ में काला नमक और एक हल्की चुटकी हींग मिलाकर दोपहर के भोजन के बाद पीने से पेट पर बोझ नहीं पड़ता और भोजन अच्छे से पचता है।
फिर भी विशेषज्ञ चेतावनी देते हैं कि इन दोनों मसालों का अत्यधिक उपयोग नुकसानदायक हो सकता है। हाई ब्लड प्रेशर, किडनी रोग या सोडियम प्रतिबंध वाले मरीजों को काला नमक सीमित मात्रा में ही लेना चाहिए। इसी तरह हींग संवेदनशील व्यक्तियों में एलर्जी या जलन पैदा कर सकती है।
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