सावधान! हर बर्तन नहीं है सुरक्षित—जानें किसमें खाना सेहत बिगाड़ सकता है

बदलते समय के साथ हमारे भोजन करने के तरीके में भी काफी बदलाव आया है। जहां पहले घरों में खाना पारंपरिक धातुओं की थालियों में परोसा जाता था, वहीं आज कांच, स्टील, प्लास्टिक और कई आधुनिक बर्तनों का उपयोग बढ़ गया है। लेकिन सवाल यह है कि इन बर्तनों में से कौन-सा हमारी सेहत के लिए सबसे सुरक्षित है और कौन-सा नुकसान पहुंचा सकता है? विशेषज्ञों का कहना है कि भोजन के पोषण मूल्य पर सिर्फ सामग्री नहीं, बल्कि वह बर्तन भी असर डालता है जिसमें उसे परोसा या पकाया जाता है।

कई अध्ययनों में पाया गया है कि गलत बर्तनों का उपयोग शरीर में रासायनिक पदार्थों की मात्रा बढ़ा सकता है, जिससे कैंसर, हार्मोनल असंतुलन और मेटाबॉलिक समस्याओं का खतरा बढ़ जाता है। दूसरी ओर, कुछ धातुएँ भोजन को सुरक्षित और स्वास्थ्यवर्धक बनाती हैं।

कांच की प्लेट: सबसे सुरक्षित विकल्प

कांच यानी ग्लास को विशेषज्ञ सबसे सुरक्षित विकल्पों में गिनते हैं। इसमें कोई रासायनिक पदार्थ नहीं होता और न ही यह भोजन के तापमान या अम्लीयता के साथ प्रतिक्रिया करता है। यही वजह है कि यह नॉन-टॉक्सिक और हाइजीनिक माना जाता है। कांच की प्लेटें आसानी से साफ होती हैं और इनमें बैक्टीरिया जमने की संभावना बेहद कम होती है। गर्म भोजन भी कांच में परोसना सुरक्षित माना जाता है।

प्लास्टिक की प्लेट: सबसे ज्यादा जोखिमभरी

प्लास्टिक बर्तनों को लेकर स्वास्थ्य विशेषज्ञ लंबे समय से चेतावनी देते आए हैं। विशेष रूप से लो-क्वालिटी प्लास्टिक गर्म भोजन के संपर्क में आने पर बीपीए (BPA) जैसे हानिकारक रसायन छोड़ सकती है। ये रसायन शरीर में प्रवेश कर हार्मोनल असंतुलन, मेटाबॉलिक समस्याएँ और यहां तक कि कैंसर का खतरा तक बढ़ाते हैं।
बच्चों के लिए प्लास्टिक प्लेटों का उपयोग बिल्कुल सुरक्षित नहीं माना जाता, क्योंकि उनकी बॉडी अधिक संवेदनशील होती है। प्लास्टिक पर खरोंच आने के बाद उसमें बैक्टीरिया जमा होने का खतरा और बढ़ जाता है। इसलिए विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि प्लास्टिक बर्तनों का उपयोग चाहे ठंडा भोजन हो या गर्म—कम से कम करें।

पीतल के बर्तन: उपयोग सही तो फायदेमंद

पीतल (ब्रास) को भारतीय परंपरा में हमेशा उपयोगी माना गया है। यह धातु कई रोगाणुओं को नष्ट करने की क्षमता रखती है। हालांकि एक महत्वपूर्ण बात अवश्य ध्यान रखनी चाहिए—पीतल के बर्तनों को टिन (कला) की परत के साथ उपयोग करना चाहिए। बिना टिन चढ़े पीतल के बर्तन अम्लीय भोजन के संपर्क में आने पर कॉपर लीचिंग कर सकते हैं, जिससे शरीर में कॉपर की मात्रा असंतुलित हो सकती है।
यदि पीतल ठीक से टिन चढ़ा हुआ हो, तो इसमें परोसा भोजन स्वास्थ्य के लिए बेहद लाभकारी माना जाता है और प्रतिरक्षा बढ़ाने में मदद करता है।

तो किस बर्तन में खाना सबसे सुरक्षित?

विशेषज्ञों की राय के अनुसार—

सबसे सुरक्षित: कांच, स्टील

सही तरीके से उपयोग करें तो सुरक्षित: टिन-चढ़ा पीतल, कांसा

कम से कम उपयोग करें: प्लास्टिक

बिल्कुल न करें: टूटा, खरोंचदार या निम्न गुणवत्ता वाला प्लास्टिक

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