क्या मुंह से सांस लेना फेफड़ों के लिए नुकसानदेह है? एक्सपर्ट ने बताया सच

आजकल अक्सर देखा जाता है कि लोग कभी-कभी या लगातार मुंह के जरिए सांस लेने लगते हैं, खासकर जब नाक बंद हो या सर्दी-जुकाम हो। लेकिन क्या आप जानते हैं कि यह आदत सिर्फ असुविधा नहीं बल्कि आपके फेफड़ों और पूरे श्वसन तंत्र के लिए भी नुकसानदेह हो सकती है? विशेषज्ञों का कहना है कि मुंह से सांस लेने के दुष्प्रभावों को समझना बेहद जरूरी है।

एक्सपर्ट की राय:
डॉक्टर और फिज़ियोथेरेपिस्ट बताते हैं कि नाक से सांस लेने और मुंह से सांस लेने में स्पष्ट अंतर है। नाक प्राकृतिक फिल्टर की तरह काम करती है, जो हवा में मौजूद धूल, बैक्टीरिया और वायरस को रोकता है। वहीं, मुंह के माध्यम से हवा सीधे फेफड़ों में जाती है, जिससे ये हानिकारक कण सीधे श्वसन तंत्र में पहुँचते हैं।

मुंह से सांस लेने के संभावित नुकसान:

फेफड़ों पर दबाव – मुंह से ली गई हवा ठंडी और सूखी होती है, जिससे फेफड़ों की परत पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है।

इम्यूनिटी कम होना – नाक का फिल्टर सिस्टम हवा को साफ करता है, जिससे संक्रमण का खतरा कम होता है। मुंह से सांस लेने पर यह सुरक्षा घट जाती है।

साइनस और खांसी की समस्या – लगातार मुंह से सांस लेने से गले और साइनस में सूजन, खांसी और गले की खराश बढ़ सकती है।

नींद पर असर – मुंह से सांस लेने वाले लोग अक्सर नींद में खर्राटे लेते हैं और नींद की गुणवत्ता कम हो जाती है, जिससे थकान और ध्यान की कमी होती है।

मुंह से सांस लेने के पीछे कारण:

जुकाम, एलर्जी या साइनस की समस्या

नाक की पॉलिप्स या नाक के अंदर की बाधा

अस्वस्थ जीवनशैली और खराब पोषण

विशेषज्ञों की सलाह:

कोशिश करें कि सांस लेने की आदत नाक के जरिए हो।

अगर नाक लगातार बंद रहती है, तो नाक साफ रखने और डॉक्टर से चेकअप करवाने की सलाह दी जाती है।

रोजाना हल्की व्यायाम, योग और प्राणायाम से नाक की क्षमता बढ़ती है और फेफड़ों की कार्यक्षमता में सुधार होता है।

बच्चों में मुंह से सांस लेने की आदत हो तो तुरंत विशेषज्ञ से सलाह लें, क्योंकि यह हड्डियों और चेहरे की संरचना पर भी असर डाल सकता है।

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