हल्दी वाला दूध, जिसे अक्सर ‘गोल्डन मिल्क’ कहा जाता है, भारतीय रसोई का एक पारंपरिक स्वास्थ्य पेय है। यह इम्यूनिटी बढ़ाने, सर्दी-जुकाम कम करने और शरीर को गर्म रखने में मदद करता है। हल्दी में मौजूद कुरकुमिन तत्व एंटीऑक्सीडेंट और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुणों से भरपूर होता है। लेकिन विशेषज्ञों की चेतावनी है कि यह पेय हर किसी के लिए फायदेमंद नहीं होता। कुछ लोगों के लिए हल्दी वाला दूध स्वास्थ्य समस्याएं बढ़ा सकता है।
कौन लोग रहें सावधान?
गैस या एसिडिटी के मरीज:
हल्दी और दूध दोनों ही कुछ लोगों में पेट में जलन और एसिडिटी बढ़ा सकते हैं। गैस या एसिडिटी की शिकायत वाले लोगों को इसका सेवन सीमित मात्रा में करना चाहिए।
किडनी या पित्त की समस्या वाले लोग:
हल्दी में मौजूद तत्व कभी-कभी किडनी और पित्ताशय पर दबाव डाल सकते हैं। ऐसे लोगों को हल्दी वाला दूध पीने से पहले डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है।
ब्लड प्रेशर और ब्लड थिनर लेने वाले लोग:
हल्दी का सेवन ब्लड को पतला कर सकता है। इसलिए ब्लड प्रेशर नियंत्रित करने वाली दवाएं या ब्लड थिनर लेने वाले लोगों को इसे अधिक मात्रा में नहीं पीना चाहिए।
दूध से एलर्जी वाले लोग:
जो लोग लैक्टोज इंटॉलरेंस या दूध से एलर्जी रखते हैं, उन्हें हल्दी वाला दूध पीने से पेट में दर्द, दस्त या त्वचा पर एलर्जी हो सकती है।
गर्भवती महिलाएं:
गर्भावस्था में अत्यधिक हल्दी का सेवन कभी-कभी गर्भ में समस्या या मितली बढ़ा सकता है। इसलिए डॉक्टर की सलाह के बिना इसका सेवन नहीं करना चाहिए।
हल्दी वाला दूध के फायदे
हल्दी वाला दूध सही मात्रा में पीने पर इम्यूनिटी बढ़ाता है, सूजन कम करता है और नींद सुधारने में मदद करता है। यह सर्दी और खांसी से राहत दिलाने के लिए पारंपरिक उपायों में शामिल है।
सही तरीका और मात्रा
विशेषज्ञों की सलाह है कि हल्दी वाला दूध रोजाना एक गिलास पर्याप्त है। इसे सुबह खाली पेट या रात को सोने से पहले पी सकते हैं। साथ ही इसे दूध के साथ हल्का गरम करके पीना चाहिए और अधिक मसाले या चीनी डालने से बचना चाहिए।
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