विटामिन D को “सनशाइन विटामिन” कहा जाता है क्योंकि यह हड्डियों और इम्यून सिस्टम के लिए बेहद ज़रूरी होता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि इसकी अधिकता भी शरीर के लिए ज़हर साबित हो सकती है?
कैसे बढ़ जाता है Vitamin D का लेवल?
आमतौर पर शरीर सूरज की रोशनी और आहार से सीमित मात्रा में विटामिन D बनाता है।
लेकिन जब लोग सप्लीमेंट्स (Vitamin D Capsules या Drops) बिना डॉक्टर की सलाह के लेते हैं, तो इसका लेवल खतरनाक रूप से बढ़ सकता है — जिसे Vitamin D Toxicity कहा जाता है।
ओवरडोज़ के लक्षण (Symptoms of Vitamin D Overdose):
- लगातार उल्टी या मितली महसूस होना
- थकान, सिरदर्द और चिड़चिड़ापन
- मांसपेशियों या हड्डियों में दर्द
- किडनी में पथरी या ब्लॉकेज
- खून में कैल्शियम की मात्रा बढ़ जाना (Hypercalcemia)
क्यों होता है ये खतरनाक?
विटामिन D की अधिकता शरीर में कैल्शियम की मात्रा को असंतुलित कर देती है, जिससे किडनी, हृदय और हड्डियों पर असर पड़ता है। लंबे समय तक ऐसा रहने पर किडनी फेलियर या हार्ट डिज़ीज़ का खतरा भी बढ़ जाता है।
सुरक्षित सेवन कैसे करें:
- विटामिन D सप्लीमेंट लेने से पहले डॉक्टर से सलाह ज़रूर लें।
- सूरज की हल्की धूप में रोज़ाना 15–20 मिनट बैठना पर्याप्त है।
- संतुलित आहार लें — जैसे दूध, अंडे, मछली और मशरूम।
विटामिन D सेहत के लिए फायदेमंद है, लेकिन “जितना ज़रूरी उतना ही सही।” इसकी अधिकता शरीर को फायदा नहीं, बल्कि गंभीर नुकसान पहुँचा सकती है। इसलिए बिना सलाह के सप्लीमेंट लेने से बचें और अपने लेवल की समय-समय पर जाँच करवाते रहें।
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