सर्दी-खांसी के मौसम में अधिकांश लोगों को एक आम लेकिन परेशान करने वाली समस्या का सामना करना पड़ता है—गला बैठ जाना। अक्सर इसे हम मामूली मान लेते हैं और घरेलू उपचारों तक सीमित रह जाते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि इसके पीछे एक वैज्ञानिक वजह भी छुपी होती है?
गला बैठने की समस्या क्यों होती है?
डॉक्टर्स के अनुसार, सर्दी-खांसी के दौरान गला बैठने का मुख्य कारण होता है गले की मांसपेशियों और टिशूज में सूजन आना। जब हम वायरस या बैक्टीरिया से संक्रमित होते हैं, तो शरीर में प्रतिरक्षा तंत्र सक्रिय होकर उस क्षेत्र में सूजन पैदा करता है ताकि संक्रमण से लड़ सके। इस सूजन के कारण गले की मांसपेशियां सिकुड़ जाती हैं, जिससे आवाज में बदलाव और गले में खराश महसूस होती है।
वैज्ञानिक कारण:
गले में सूजन के साथ-साथ बलगम का जमाव भी एक बड़ी समस्या बनता है। बलगम गले के अंदर जमा होकर आवाज के तारों को दबाता है और आवाज को कमजोर कर देता है। इसके अलावा, लगातार खांसी से गले की मांसपेशियां और भी ज्यादा थक जाती हैं, जिससे गला और अधिक बैठ जाता है।
गला बैठने का प्रभाव
गला बैठने के कारण आवाज में खराश, बोलने में कठिनाई और गले में जलन होती है। कुछ मामलों में यह समस्या कुछ दिनों तक बनी रह सकती है और यदि सही इलाज न किया जाए तो लारिंगाइटिस जैसी गंभीर स्थिति भी पैदा हो सकती है।
विशेषज्ञों की सलाह
ईएनटी विशेषज्ञ डॉ. कहती हैं, “सर्दी-खांसी के दौरान गले की देखभाल बहुत जरूरी होती है। गला बैठने पर गर्म पानी से गरारे करें, अधिक से अधिक पानी पिएं और धूम्रपान या ठंडी चीजों से बचें। यदि समस्या अधिक समय तक बनी रहे तो डॉक्टर से परामर्श अवश्य लें।”
बचाव के उपाय
नियमित गरारे करें, खासकर नमक पानी के।
पर्याप्त मात्रा में पानी पीते रहें ताकि गले का बलगम पतला हो।
गर्म-गर्म चाय में शहद मिलाकर पीना फायदेमंद रहता है।
धूम्रपान और ठंडी चीजों से बचाव करें।
अगर अधिक खराश या दर्द हो तो गले को आराम दें, ज्यादा आवाज न निकालें।
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