पश्चिम बंगाल के दुर्गापुर में एक नाबालिग लड़की से हुए कथित गैंगरेप मामले ने जहां पूरे राज्य को झकझोर दिया है, वहीं अब इस संवेदनशील घटना पर तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के सांसद की विवादास्पद टिप्पणी ने एक नया विवाद खड़ा कर दिया है।
टीएमसी सांसद द्वारा दिया गया बयान—”ऐसी घटनाएं तो हर देश में होती हैं, कोई भी देश इससे अछूता नहीं है”—सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक गलियारों तक कड़ी आलोचना का विषय बन गया है। पीड़िता के परिवार को जहां अब भी न्याय का इंतजार है, वहीं सत्ता पक्ष की इस तरह की टिप्पणी को संवेदनहीनता करार दिया जा रहा है।
घटना का संदर्भ
दुर्गापुर में बीते दिनों एक नाबालिग लड़की के साथ सामूहिक दुष्कर्म की खबर सामने आई थी। मामला गंभीर होने के कारण प्रशासन और पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठे। राज्य सरकार पर विपक्ष लगातार दबाव बना रहा है कि दोषियों पर सख्त कार्रवाई हो, लेकिन अब जब सत्ताधारी दल के सांसद ही इस तरह की टिप्पणी कर रहे हैं, तो मामला और भी गरमा गया है।
राजनीतिक प्रतिक्रियाएं तेज
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और वाम दलों ने इस बयान को लेकर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और उनकी पार्टी को कठघरे में खड़ा कर दिया है। भाजपा प्रवक्ता ने कहा, “जब जनप्रतिनिधि बलात्कार जैसी अमानवीय घटनाओं को सामान्य ठहराने लगें, तो समझ लीजिए कि सत्ता कैसे संवेदना से कोसों दूर जा चुकी है।”
सामाजिक संगठनों ने भी की निंदा
महिला आयोग सहित कई सामाजिक संगठनों ने भी टीएमसी सांसद की टिप्पणी पर गहरी आपत्ति जताई है। महिला अधिकार कार्यकर्ता रंजना घोष ने कहा, “बलात्कार जैसी घटना की तुलना किसी वैश्विक सामान्यता से करना, पीड़िता और उसके परिवार का अपमान है।”
सत्ताधारी दल की सफाई
हालांकि टीएमसी की ओर से बाद में इस बयान को “संदर्भ से काटकर पेश किया गया” बताया गया। पार्टी के एक अन्य नेता ने मीडिया से कहा कि सांसद का आशय यह नहीं था कि ऐसी घटनाएं सामान्य हैं, बल्कि वह यह कह रहे थे कि समाज को इन घटनाओं के खिलाफ एकजुट होना चाहिए।
जनता में आक्रोश
स्थानीय स्तर पर आम जनता इस बयान से बेहद नाराज नजर आ रही है। कई इलाकों में प्रदर्शन हुए, जिनमें टीएमसी नेताओं के पुतले फूंके गए और नारेबाजी की गई। लोगों का कहना है कि जब सत्ता पक्ष खुद ऐसे मामलों को गंभीरता से नहीं लेता, तो न्याय की उम्मीद कैसे की जाए?
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