हड्डियां हमारे शरीर की आधारशिला हैं। स्वस्थ और मजबूत हड्डियों के बिना दैनिक जीवन की कई गतिविधियां मुश्किल हो जाती हैं। इस संदर्भ में विटामिन डी और कैल्शियम की अहमियत बहुत ज्यादा होती है। हाल के दिनों में हड्डियों से जुड़ी समस्याएं, जैसे ऑस्टियोपोरोसिस (हड्डियों का कमजोर होना) और फ्रैक्चर की बढ़ती संख्या के कारण ये विषय फिर से चर्चा में आ गया है। आज हम इस मुद्दे पर एक्सपर्ट की सलाह के साथ जानेंगे कि विटामिन डी और कैल्शियम हड्डियों के लिए क्यों अनिवार्य हैं।
कैल्शियम: हड्डियों का मुख्य घटक
कैल्शियम हमारे शरीर की सबसे ज्यादा मात्रा में मौजूद खनिज है, और लगभग 99% कैल्शियम हमारे हड्डियों और दांतों में पाया जाता है। यह हड्डियों को ताकत देता है और उनके घनत्व को बनाए रखता है। कैल्शियम की कमी से हड्डियां कमजोर हो सकती हैं, जिससे फ्रैक्चर का खतरा बढ़ जाता है।
विटामिन डी: कैल्शियम के अवशोषण का साथी
विटामिन डी का काम है कैल्शियम के अवशोषण में मदद करना। बिना पर्याप्त विटामिन डी के शरीर कैल्शियम को सही तरीके से उपयोग नहीं कर पाता, भले ही कैल्शियम की मात्रा पर्याप्त हो। विटामिन डी की कमी से हड्डियां न केवल कमजोर होती हैं, बल्कि हड्डियों में दर्द और मांसपेशियों की कमजोरी भी हो सकती है।
एक्सपर्ट की राय
डॉक्टर और पोषण विशेषज्ञों का कहना है कि हड्डियों की सेहत के लिए दोनों पोषक तत्वों का संतुलित सेवन जरूरी है। खासकर बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं में कैल्शियम और विटामिन डी की कमी से बचाव के लिए नियमित जांच और सही डाइट प्लान अपनाना चाहिए।
विटामिन डी की मुख्य स्रोतों में सूरज की रोशनी प्रमुख है, साथ ही दूध, मछली, अंडे और काली मछली जैसे खाद्य पदार्थ भी विटामिन डी प्रदान करते हैं। वहीं, कैल्शियम के लिए दूध, दही, पनीर, हरी पत्तेदार सब्जियां और नट्स फायदेमंद होते हैं।
कैल्शियम और विटामिन डी की कमी के खतरे
हड्डियों का कमजोर होना और ऑस्टियोपोरोसिस
बार-बार फ्रैक्चर होना
मांसपेशियों में कमजोरी और दर्द
बढ़ती उम्र में चलने-फिरने में दिक्कत
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