किडनी यानी गुर्दे हमारे शरीर की सफाई व्यवस्था की रीढ़ हैं। ये खून को छानने, शरीर से विषैले पदार्थ बाहर निकालने और रक्तचाप को नियंत्रित करने जैसे महत्वपूर्ण कार्य करते हैं। लेकिन जब इनकी सेहत बिगड़ने लगती है, तो शरीर हल्के-फुल्के संकेत देने लगता है — जिन्हें अक्सर हम मामूली समझकर नजरअंदाज़ कर देते हैं। विशेषज्ञों की मानें तो किडनी डैमेज की शुरुआती पहचान समय रहते हो जाए, तो गंभीर जटिलताओं से बचा जा सकता है।
नीचे बताए जा रहे 8 संकेत ऐसे हैं, जो अगर बार-बार दिखाई दें, तो तुरंत डॉक्टरी सलाह लेनी चाहिए।
बार-बार पेशाब आना (खासकर रात में)
अगर रात में बार-बार पेशाब के लिए उठना पड़ रहा है, तो यह किडनी के फिल्ट्रेशन फ़ंक्शन में गड़बड़ी का संकेत हो सकता है।
पेशाब में झाग या बदबू
झागदार या दुर्गंधयुक्त पेशाब इस बात का संकेत हो सकता है कि प्रोटीन शरीर से अनावश्यक रूप से बाहर निकल रहा है — जो किडनी डैमेज का लक्षण है।
पैरों, टखनों और चेहरे पर सूजन
किडनी ठीक से काम नहीं कर रही हो, तो शरीर में सोडियम और फ्लूइड जमा होने लगता है जिससे सूजन आ सकती है।
थकान और कमजोरी महसूस होना
किडनी की खराबी से शरीर में जरूरी हार्मोन (जैसे एरिथ्रोपॉयटिन) की कमी हो जाती है, जिससे खून की कमी और थकावट महसूस होती है।
त्वचा पर खुजली और रूखापन
किडनी फॉस्फेट को बाहर नहीं निकाल पाती तो वह खून में जमा होकर त्वचा में जलन और खुजली पैदा करता है।
भूख में कमी और उल्टी जैसा महसूस होना
विषैले तत्व जब शरीर में जमा होने लगते हैं, तो पाचन तंत्र प्रभावित होता है। इसका सीधा असर भूख और पेट पर पड़ता है।
सांस फूलना
अगर किडनी पूरी तरह से फ़िल्टरिंग नहीं कर पा रही, तो शरीर में फ्लूइड फेफड़ों में भर सकता है, जिससे सांस लेने में तकलीफ हो सकती है।
ध्यान केंद्रित करने में परेशानी और भ्रम की स्थिति
शरीर में विषैले पदार्थ बढ़ने से मस्तिष्क की कार्यक्षमता पर असर पड़ता है। याददाश्त कमज़ोर होना, चक्कर आना या भ्रम होना इसके लक्षण हो सकते हैं।
विशेषज्ञों की राय
नेफ्रोलॉजिस्ट डॉ. के अनुसार, “किडनी की बीमारी ‘साइलेंट किलर’ की तरह काम करती है। शुरुआती लक्षण बेहद हल्के होते हैं, लेकिन अगर समय रहते जांच न कराई जाए तो यह स्थायी क्षति का रूप ले सकती है।”
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