अल्जाइमर एक न्यूरोलॉजिकल बीमारी है जो याददाश्त और सोचने-समझने की क्षमता को प्रभावित करती है। हाल के अध्ययनों में पता चला है कि महिलाओं में अल्जाइमर के मामले पुरुषों की तुलना में तेजी से बढ़ रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इसके पीछे कई जैविक और हार्मोनल कारण हैं।
हार्मोनल बदलाव का असर
महिलाओं में मेनोपॉज़ और एस्ट्रोजेन हार्मोन में गिरावट मस्तिष्क की कोशिकाओं और न्यूरॉन्स पर सीधे असर डालती है। एस्ट्रोजेन मस्तिष्क में न्यूरोट्रांसमीटर के स्तर को बनाए रखने में मदद करता है और स्मरण शक्ति को मजबूत रखता है। हार्मोनल गिरावट से स्मृति कमजोर होती है और अल्जाइमर का जोखिम बढ़ जाता है।
अन्य प्रमुख कारण
- जीन और पारिवारिक इतिहास – यदि परिवार में किसी को अल्जाइमर है, तो जोखिम बढ़ जाता है।
- लाइफस्टाइल और डायट – उच्च शुगर, अनहेल्दी फैट और कम फिजिकल एक्टिविटी मस्तिष्क को कमजोर करती हैं।
- मानसिक तनाव और नींद की कमी – लगातार तनाव और नींद न मिलने से न्यूरॉन्स की मरम्मत प्रभावित होती है।
शुरुआती लक्षण
- छोटी-छोटी चीज़ें भूल जाना
- बातचीत में शब्द ढूंढने में परेशानी
- दिशा या समय का भ्रम
- मूड में अचानक बदलाव
रोकथाम के उपाय
- संतुलित आहार: ओमेगा-3, हरी पत्तेदार सब्ज़ियां और फल शामिल करें।
- मानसिक व्यायाम: पज़ल्स, पढ़ाई और नई स्किल सीखना।
- नियमित व्यायाम और योग: रक्त संचार बेहतर बनाता है और मस्तिष्क को सक्रिय रखता है।
- नींद और तनाव नियंत्रण: 7–8 घंटे नींद और ध्यान या मेडिटेशन मददगार हैं।
महिलाओं में अल्जाइमर के बढ़ते मामलों का मुख्य कारण हार्मोनल बदलाव है, लेकिन सही जीवनशैली, मानसिक व्यायाम और संतुलित आहार से इसका जोखिम कम किया जा सकता है। शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज न करें और समय पर डॉक्टर से सलाह लें।
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