यूक्रेन और रूस के बीच जारी संघर्ष में एक नया मोड़ आ गया है। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने यूक्रेन की राजधानी कीव पर हमला करने के लिए इजरायल द्वारा ईरान पर अपनाई गई रणनीति का सहारा लिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस रणनीति का उद्देश्य तेजी से और प्रभावी ढंग से लक्ष्य पर प्रहार कर युद्ध को एक निर्णायक मोड़ पर ले जाना है।
इजरायल ने अपने इतिहास में कई बार ईरान जैसे दुश्मनों पर अचूक रणनीतियों के तहत सटीक और झटपट हमले किए हैं, जिनमें ड्रोन, मिसाइल और स्पेशल ऑपरेशन का प्रभावी इस्तेमाल हुआ। अब ऐसा प्रतीत हो रहा है कि पुतिन ने भी इसी शैली को अपनाते हुए कीव पर हमला तेज़ कर दिया है। इस रणनीति में असमय और आश्चर्यजनक हमले शामिल हैं, जिनका मकसद दुश्मन की तैयारियों को खत्म करना और उनकी प्रतिक्रिया समय को कम करना होता है।
रूस की ओर से इस रणनीति का इस्तेमाल कीव पर किए गए हालिया हवाई हमलों और मिसाइल स्ट्राइक में देखा गया है। यूक्रेन के रक्षा सूत्रों ने कहा कि ये हमले अधिक व्यवस्थित और संगठित हैं, जो इजरायली रणनीति की झलक देते हैं। इससे कीव और उसके आसपास के इलाकों में सुरक्षा की स्थिति और खराब हो गई है।
इस हमले के पीछे की मुख्य वजह पुतिन का यूक्रेन पर बढ़ते दबाव को और तेज करना है। पिछले कुछ महीनों से रूसी सेना को यूक्रेन में कई मोर्चों पर संघर्ष का सामना करना पड़ रहा है, और अब पुतिन ने तेज और निर्णायक कार्रवाई की रणनीति अपनाई है।
विश्लेषकों के अनुसार, पुतिन की यह चाल रूस की ओर से एक नई युद्ध नीति को दर्शाती है, जिसमें आधुनिक तकनीक और तेज हमलों को शामिल किया गया है। इससे न केवल यूक्रेन की सेना पर भारी दबाव पड़ेगा, बल्कि पश्चिमी देशों के समर्थन पर भी असर डालने की कोशिश की जा रही है।
यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने इस रणनीतिक हमले को “एक नई चुनौती” करार दिया है और देशवासियों से संयम और एकजुटता बनाए रखने की अपील की है। वहीं, पश्चिमी देशों ने रूस की इस चाल की निंदा करते हुए यूक्रेन को और अधिक सैन्य सहायता देने का ऐलान किया है।
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