टाइफाइड बुखार, जो सालों से भारत सहित कई देशों में स्वास्थ्य के लिए एक गंभीर खतरा बना हुआ है, अब एक सामान्य घरेलू पदार्थ की मदद से नियंत्रित किया जा सकता है। ताजा वैज्ञानिक अध्ययन में यह दावा किया गया है कि टमाटर का रस टाइफाइड के कारण बनने वाले बैक्टीरिया को खत्म करने में सहायक हो सकता है।
टाइफाइड बुखार एक संक्रामक रोग है, जो साल्मोनेला टाइफी बैक्टीरिया के कारण होता है। यह बीमारी खासतौर पर दूषित पानी या भोजन के सेवन से फैलती है। तेज बुखार, कमजोरी, पेट दर्द और पाचन संबंधी समस्याएं इसके मुख्य लक्षण हैं। भारत में हर साल लाखों लोग इससे प्रभावित होते हैं और दवाइयों के बढ़ते खर्च के कारण घरेलू उपचारों की ओर भी रुझान बढ़ा है।
नई स्टडी में क्या मिला?
हाल ही में एक प्रतिष्ठित मेडिकल रिसर्च संस्था ने टमाटर के रस पर किए गए प्रयोग में पाया कि इसके अंदर मौजूद लाइकोपीन, विटामिन C और प्राकृतिक एंटीऑक्सिडेंट टाइफाइड के बैक्टीरिया को प्रभावी ढंग से मारने में मदद करते हैं।
स्टडी के अनुसार, टमाटर के रस में मौजूद तत्व बैक्टीरिया की सेल मेम्ब्रेन को नुकसान पहुंचाकर उसे निष्क्रिय कर देते हैं, जिससे संक्रमण की तीव्रता कम होती है।
टमाटर का रस क्यों है फायदेमंद?
प्राकृतिक एंटीबायोटिक प्रभाव
टमाटर में पाये जाने वाले पोषक तत्व शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाते हैं और बैक्टीरिया से लड़ने में मदद करते हैं।
पाचन में सुधार
टमाटर के रस का सेवन पेट के एसिडिटी और गैस की समस्या को कम करता है, जो टाइफाइड से पीड़ित मरीजों के लिए राहत की बात होती है।
इम्यूनिटी बूस्टर
विटामिन C से भरपूर होने के कारण यह शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत बनाता है, जिससे बुखार और संक्रमण से जल्दी उबरने में मदद मिलती है।
कैसे करें टमाटर के रस का सेवन?
ताजे पके हुए टमाटर को धोकर मिक्सर में पीस लें और उसका रस निकाल लें।
इस रस में थोड़ा सा नींबू और नमक मिला कर दिन में 2 बार सेवन करें।
टाइफाइड के दौरान डॉक्टर की सलाह के साथ इसे शामिल करें, दवाओं का सेवन बंद न करें।
विशेष ध्यान
टमाटर का रस टाइफाइड का प्रतिस्थापन नहीं है, बल्कि यह एक सहायक घरेलू उपाय है। टाइफाइड के इलाज के लिए हमेशा डॉक्टर की सलाह लेना आवश्यक है। संक्रमण के बढ़ने पर दवाओं का समय पर सेवन बेहद जरूरी होता है।
विशेषज्ञ की राय:
इंटर्नल मेडिसिन स्पेशलिस्ट, कहती हैं, “टमाटर का रस एक प्राकृतिक और सुरक्षित उपाय हो सकता है जो टाइफाइड के इलाज में सहायक होता है। लेकिन गंभीर मामलों में दवाओं का सेवन जरूरी है। घरेलू उपायों को संयोजन के तौर पर ही अपनाना चाहिए।”
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