नमक हमारे भोजन का अहम हिस्सा है, लेकिन किडनी से जुड़ी बीमारियों में यह स्वाद के साथ-साथ एक गंभीर चिंता का विषय भी बन जाता है। यदि आप किडनी रोग से पीड़ित हैं, तो यह जानना बेहद जरूरी है कि आपको कितना और किस प्रकार का नमक खाना चाहिए। सही मात्रा और प्रकार का नमक न सिर्फ किडनी की स्थिति को स्थिर बनाए रख सकता है, बल्कि रोग की प्रगति को भी धीमा कर सकता है।
नमक और किडनी: क्या है संबंध?
नमक यानी सोडियम क्लोराइड (Sodium Chloride) शरीर में पानी और मिनरल्स के संतुलन को बनाए रखने में मदद करता है। लेकिन जब किडनी सही से काम नहीं करती, तो वह अतिरिक्त सोडियम और पानी को शरीर से बाहर नहीं निकाल पाती। इससे ब्लड प्रेशर बढ़ता है, सूजन आ सकती है और दिल व किडनी पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है।
वरिष्ठ नेफ्रोलॉजिस्ट, कहती हैं, “किडनी के मरीजों को कम सोडियम डाइट अपनानी चाहिए। अतिरिक्त नमक किडनी को और नुकसान पहुंचा सकता है।”
कितना नमक है सुरक्षित?
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, एक स्वस्थ व्यक्ति को दिनभर में अधिकतम 5 ग्राम नमक (लगभग एक चम्मच) ही लेना चाहिए।
लेकिन किडनी रोगियों के लिए यह मात्रा और भी कम हो सकती है —
2 से 3 ग्राम प्रतिदिन, जो डॉक्टर की सलाह से तय होनी चाहिए।
कौन सा नमक चुनें?
लो-सोडियम नमक (Low Sodium Salt):
इस नमक में सोडियम की मात्रा कम और पोटैशियम की मात्रा अधिक होती है। लेकिन अगर किडनी रोगी को पोटैशियम भी नियंत्रित रखना है, तो इसका सेवन बिलकुल डॉक्टर की सलाह पर करें।
सेंधा नमक (Rock Salt):
पारंपरिक रूप से उपवास में प्रयोग किया जाने वाला सेंधा नमक थोड़े बेहतर विकल्प के रूप में देखा जाता है, लेकिन इसकी भी सीमित मात्रा ही उपयुक्त है।
सादा टेबल सॉल्ट (Table Salt):
इससे परहेज़ जरूरी है, क्योंकि इसमें आयोडीन और सोडियम दोनों अधिक होते हैं।
नमक से होने वाली संभावित समस्याएं
हाई ब्लड प्रेशर
शरीर में सूजन (पैरों या चेहरे पर)
सांस लेने में तकलीफ
किडनी फंक्शन में और गिरावट
हार्ट फेल होने का खतरा
कम नमक वाले विकल्प अपनाएं
उबले या भाप में पकाए गए सब्जियां
नींबू, हर्ब्स, लहसुन और काली मिर्च से स्वाद बढ़ाएं
प्रोसेस्ड फूड, चिप्स, अचार और पैक्ड चीज़ें बिल्कुल न खाएं
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