आयुर्वेद की एक अमूल्य औषधि, गिलोय (Giloy), जिसे ‘रज्जा बूटी’ भी कहा जाता है, पिछले कई दशकों से स्वास्थ्य सुधार में अपनी महत्ता साबित कर रहा है। प्राकृतिक रूप से मिलने वाला यह जड़ी-बूटी न केवल रोगों से लड़ने में मदद करता है बल्कि शरीर की रोग-प्रतिरोधक क्षमता भी बढ़ाता है। विशेषज्ञों के अनुसार, गिलोय का नियमित सेवन कई गंभीर बीमारियों में लाभकारी होता है। आइए जानते हैं उन पांच प्रमुख बीमारियों के बारे में जिनमें गिलोय है एक सच्चा रामबाण।
1. इम्यून सिस्टम को मजबूत करना
गिलोय में मौजूद सक्रिय तत्व शरीर की रोग-प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाते हैं। यह वायरल, बैक्टीरियल और फंगल संक्रमणों से लड़ने में मदद करता है। खासकर कोविड-19 जैसी बीमारियों के दौर में गिलोय की मांग काफी बढ़ी है क्योंकि यह इम्यूनिटी बूस्टर के तौर पर जाना जाता है।
2. बुखार और संक्रमण में राहत
गिलोय का सेवन शरीर में बुखार को कम करने में सहायक होता है। यह मलेरिया, डेंगू और वायरल फीवर जैसे संक्रमणों से लड़ने में मददगार है। इसकी एंटी-इंफ्लेमेटरी और एंटीबैक्टीरियल गुण संक्रमण से लड़ने में कारगर साबित होते हैं।
3. डायबिटीज नियंत्रण में सहायक
गिलोय ब्लड शुगर के स्तर को नियंत्रित करने में मदद करता है। यह पैंक्रियाज की कार्यक्षमता बढ़ाता है और इंसुलिन उत्पादन को संतुलित करता है। इसलिए, डायबिटीज के मरीजों के लिए यह एक प्राकृतिक विकल्प साबित हो सकता है।
4. पाचन तंत्र की समस्याओं में फायदेमंद
गिलोय कब्ज, एसिडिटी और अपच जैसी पाचन संबंधी समस्याओं को दूर करता है। यह लीवर को डिटॉक्सिफाई करता है और पाचन प्रक्रिया को दुरुस्त बनाता है। इसके सेवन से पेट से जुड़ी बीमारियों में राहत मिलती है।
5. त्वचा रोगों में लाभकारी
गिलोय के एंटीऑक्सिडेंट गुण त्वचा को साफ और स्वस्थ बनाए रखने में मदद करते हैं। यह मुँहासे, दाद-खाज जैसी त्वचा संबंधी बीमारियों से लड़ता है और त्वचा की प्राकृतिक चमक लौटाता है।
विशेषज्ञों की सलाह
आयुर्वेदिक चिकित्सकों का कहना है कि गिलोय का सेवन विभिन्न रूपों में किया जा सकता है — काढ़ा, रस, पाउडर या कैप्सूल। हालांकि, इसे नियमित लेने से पहले डॉक्टर या आयुर्वेदाचार्य से सलाह अवश्य लें, खासकर यदि आप किसी दूसरी दवा पर हैं।
यह भी पढ़ें:
रूस ने यूक्रेन पर किया भीषण हमला, दर्ज करें ये हालात और अमेरिका की नई प्रतिक्रिया
Navyug Sandesh Hindi Newspaper, Latest News, Findings & Fact Check