वनतारा को मिली सुप्रीम कोर्ट की क्लीन चिट, केस खारिज

सुप्रीम कोर्ट ने वनतारा पर लगे सभी आरोपों को खारिज करते हुए उसे क्लीन चिट दे दी है। शीर्ष अदालतगुजरात के जामनगर में रिलायंस फाउंडेशन द्वारा संचालित वनतारा (ग्रीन्स जूलॉजिकल रेस्क्यू एंड रिहैबिलिटेशन सेंटर) की जाँच की माँग वाली याचिका पर सुनवाई कर रही थी। वनतारा पर जो आरोप लगाए गए थेभविष्य में वैसे ही आरोपों पर की गई शिकायतों या कार्यवाही पर भी शीर्ष अदालत ने कुछ शर्तों के साथ रोक लगा दी है। वनतारा और संबंधित अधिकारियों को एसआईटी द्वारा सुझाए गए उपायों पर विचार करने और उन्हें लागू करने का निर्देश भी कोर्ट ने दिया।

इससे पहले मामले की जाँच कर रही सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त एसआईटी ने भी गुजरात के जामनगर स्थित प्राणी बचाव एवं पुनर्वास केंद्र वनतारा को क्लीन चिट दे दी थी। न्यायमूर्ति पंकज मिथल और न्यायमूर्ति पी.बी. वराले की पीठ ने रिपोर्ट को रिकॉर्ड में लिया और कहा कि वनतारा में अनुपालन और नियमों की पालना के मुद्दे को लेकर एसआईटी संतुष्ट है। 

एसआईटी की रिपोर्ट को सीलबंद करकेगोपनीय रखने का आदेश कोर्ट ने दिया। हालांकि वनतारा को उसके अपने उपयोग के लिए इसकी प्रति उपलब्ध कराई जाएगी। शीर्ष कोर्ट ने एसआईटी की जांच के निष्कर्षों को गोपनीय नहीं माना। कोर्ट ने कहा कि “हम प्रतिवादी – वनतारा को किसी भी आपत्तिजनक प्रकाशन को हटाने या गलत सूचना के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई करने या मानहानि के लिए कार्रवाई करने की स्वतंत्रता देते हैं।“ 

कोर्ट के फैसले पर खुशी जताते हुए वनतारा के प्रवक्ता ने कहा कि “हम अत्यंत विनम्रता और कृतज्ञता के साथमाननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा नियुक्त विशेष जांच दल (एसआईटी) के निष्कर्षों का स्वागत करते हैं। एसआईटी की रिपोर्ट और माननीय सर्वोच्च न्यायालय के आदेश ने स्पष्ट कर दिया है कि वनतारा के पशु कल्याण मिशन के विरुद्ध उठाए गए संदेह और आरोप निराधार थे। वनतारा हमेशा से बेजुबानों के प्रति प्रेमकरुणा और जिम्मेदारी का प्रतीक रहा है। हमारे द्वारा बचाया गया प्रत्येक जानवरप्रत्येक पक्षीहमें याद दिलाता है कि वे हमसे अलग नहीं हैं। जब हम जानवरों की देखभाल करते हैंतो हम मानवता की आत्मा की भी देखभाल कर रहे होते हैं।“

कोर्ट ने मीडिया और सोशल मीडिया में आई खबरों और गैर-सरकारी संगठनों व वन्यजीव संगठनों की विभिन्न शिकायतों के आधार पर वनतारा के खिलाफ अनियमितताओं का आरोप लगाने वाली दो जनहित याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए एक सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति जे. चेलमेश्वर की अध्यक्षता में चार सदस्यीय विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया था। पिछले माह 25 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट ने एसआईटी गठन का आदेश दिया था। एसआईटी ने शुक्रवार को  सीलबंद लिफाफे में अपनी रिपोर्ट कोर्ट को सौंप दी थी।