ग्वालियर की सड़कों पर सिंधिया ने दिखाई सख्ती, कहा – अब बहाने नहीं चलेंगे, जनता को जवाब चाहिए

हाल ही में कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने मध्य प्रदेश की सड़कों की बदहाली पर सरकार को घेरा था। अब केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने खुद ग्वालियर पहुंचकर सड़क व्यवस्था की जमीनी हकीकत देखी और अधिकारियों की जमकर क्लास ली। सिंधिया ने माना कि ग्वालियर की कई सड़कें जर्जर हालत में हैं, और उनकी मरम्मत में लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

ग्वालियर के विभिन्न क्षेत्रों में दौरा करते हुए सिंधिया ने अधिकारियों से सवाल किया कि “इतने सालों से शिकायतें मिल रही हैं, अब तक सुधार क्यों नहीं हुआ?” उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि अब कार्य योजना फाइलों में नहीं, जमीन पर नजर आनी चाहिए।

“अब काम दिखना चाहिए, बहाने नहीं” – सिंधिया का सख्त संदेश

ग्वालियर शहर में सड़कों की स्थिति को लेकर स्थानीय जनता में लंबे समय से नाराज़गी है। कई इलाकों में गड्ढों से भरी सड़कों के चलते यातायात में बाधा और दुर्घटनाएं आम हो गई थीं। सिंधिया ने अधिकारियों को फटकार लगाते हुए कहा:

“जनता हमें वोट सेवा के लिए देती है, कागजी कार्रवाई के लिए नहीं। अगले 60 दिनों में सड़कें दुरुस्त होनी चाहिए, वरना कार्रवाई तय है।”

राहुल गांधी के बयान से बढ़ा दबाव?

गौरतलब है कि बीते सप्ताह राहुल गांधी ने मध्य प्रदेश की टूटी सड़कों पर तंज कसते हुए कहा था कि ‘डबल इंजन की सरकार’ सिर्फ विज्ञापनों में तेज चलती है, असल में नहीं। इसके बाद से सत्ताधारी दल पर जवाब देने का दबाव था।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि सिंधिया की यह सक्रियता सिर्फ प्रशासनिक नहीं, बल्कि राजनीतिक संदेश भी है — खासकर तब, जब ग्वालियर भाजपा के लिए प्रतिष्ठा का विषय बन चुका है।

अधिकारियों को मिले स्पष्ट निर्देश

सिंधिया ने नगर निगम, पीडब्ल्यूडी और एनएचएआई के अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की। उन्होंने:

जर्जर सड़कों की जियो-टैगिंग करने के निर्देश दिए

वार्ड स्तर पर मरम्मत कार्य की निगरानी के लिए अलग टीमें गठित करने को कहा

कार्य की समयसीमा तय करते हुए साप्ताहिक रिपोर्ट देने को अनिवार्य बनाया

उन्होंने यह भी कहा कि जनता के प्रति जवाबदेही अब सिर्फ राजनीतिक नहीं, प्रशासनिक भी होनी चाहिए।

जनता को उम्मीद, राजनीति से हटकर दिखेगा असर?

स्थानीय नागरिकों को उम्मीद है कि सिंधिया की यह सक्रियता केवल बयानबाज़ी न होकर व्यवहारिक बदलाव में तब्दील होगी। बीते वर्षों में शहर में कई योजनाएं घोषणाओं तक सीमित रही हैं। अब देखना यह है कि क्या यह अभियान सिर्फ चुनावी रणनीति है या असली सुधार की शुरुआत।

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