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क्या सोने से पहले फोन स्क्रॉल करने की आदत हृदय को नुकसान पहुंचाती है? विशेषज्ञों की चेतावनी पर ध्यान दें

मोबाइल फोन आज हर व्यक्ति की दिनचर्या का अहम हिस्सा बन चुका है। सुबह की शुरुआत और रात का अंत इसी की स्क्रीन पर होता है। विशेषकर रात के समय, जब व्यक्ति बिस्तर पर जाता है, तो “थोड़ा सा स्क्रॉल” करने की आदत कब घंटों तक स्क्रीन पर नजरें गड़ाने में बदल जाती है, पता ही नहीं चलता। परंतु यह आदत क्या केवल नींद को ही प्रभावित करती है, या इसका संबंध दिल की सेहत से भी है? आइए जानते हैं विशेषज्ञों की राय।

नींद में खलल, दिल पर बोझ
विशेषज्ञ मानते हैं कि सोने से पहले मोबाइल का अत्यधिक उपयोग सीधे तौर पर नींद की गुणवत्ता को प्रभावित करता है। स्क्रीन से निकलने वाली ब्लू लाइट (नीली रोशनी) मेलाटोनिन हार्मोन के उत्पादन में बाधा डालती है, जो नींद के चक्र को नियंत्रित करता है। नींद में खलल आने से शरीर का रिकवरी सिस्टम प्रभावित होता है और इससे ब्लड प्रेशर, हृदय गति और तनाव स्तर में असंतुलन आ सकता है।

विशेषज्ञों की चेतावनी
डॉ. बताते हैं, “लगातार नींद की कमी से कोर्टिसोल नामक तनाव हार्मोन का स्तर बढ़ता है, जिससे हृदय पर दवाब पड़ता है। यह स्थिति लंबे समय तक बनी रही, तो हृदय रोगों की संभावना बढ़ जाती है।”

युवाओं में बढ़ रहा है खतरा
तेजी से बदलती जीवनशैली और मोबाइल पर बढ़ती निर्भरता के कारण 20 से 40 वर्ष की आयु वर्ग में हार्ट अटैक और हाई ब्लड प्रेशर जैसे मामले बढ़ते देखे जा रहे हैं। विशेषज्ञ इसे “डिजिटल लाइफस्टाइल सिंड्रोम” कह रहे हैं, जहां व्यक्ति की नींद, खान-पान और तनाव का स्तर तकनीक की वजह से असंतुलित हो रहा है।

क्या कहती हैं रिसर्च?
हाल ही में प्रकाशित एक अध्ययन में पाया गया कि जो लोग सोने से पहले एक घंटे से अधिक समय तक मोबाइल का उपयोग करते हैं, उनमें नींद की अवधि औसतन 30 मिनट तक घट जाती है, और हृदय की धड़कन तेज हो जाती है। अमेरिका की ‘नेशनल स्लीप फाउंडेशन’ के अनुसार, मोबाइल स्क्रॉलिंग करने वाले लोगों में इंसोम्निया (नींद न आना) और हाइपरटेंशन के लक्षण सामान्य से अधिक देखे गए।

समाधान क्या है?
स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सलाह है कि सोने से कम से कम 30 से 60 मिनट पहले मोबाइल फोन, लैपटॉप या टैबलेट का उपयोग बंद कर देना चाहिए। इसके स्थान पर किताब पढ़ना, मेडिटेशन करना या हल्की संगीत सुनना बेहतर विकल्प हो सकते हैं। साथ ही, फोन पर “नाइट मोड” या ब्लू लाइट फिल्टर का इस्तेमाल करने की सलाह भी दी जाती है।

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