भारत के उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने अपने पद से अचानक स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए इस्तीफा दे दिया है। सोमवार देर शाम राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को भेजे गए अपने पत्र में उन्होंने कहा कि वह संविधान के अनुच्छेद 67(ए) के तहत “स्वास्थ्य सेवा को प्राथमिकता” देने के लिए तत्काल प्रभाव से इस्तीफा दे रहे हैं।
धनखड़ का कार्यकाल 2027 तक था, लेकिन तीन साल पूरे होते ही उनका यह कदम कई सवालों को जन्म दे रहा है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति मुर्मू के सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया और कहा कि देश की प्रगति का हिस्सा बनना उनके लिए गर्व की बात रही।
अचानक लिया गया निर्णय?
धनखड़ के इस्तीफे की जानकारी उनके कार्यालय को भी नहीं थी। जबकि मंगलवार के लिए उन्होंने कार्य मंत्रणा समिति की बैठक बुला रखी थी और जयपुर में भी एक कार्यक्रम में हिस्सा लेने वाले थे। इससे साफ है कि यह फैसला बेहद अचानक लिया गया, जिससे सियासी गलियारों में हलचल मच गई है।
विपक्ष के साथ टकराव और अविश्वास प्रस्ताव
धनखड़ का कार्यकाल तब विवादों में आया जब 2024 में पहली बार किसी उपराष्ट्रपति के खिलाफ विपक्ष ने अविश्वास प्रस्ताव लाया। इंडिया गठबंधन की ओर से 60 सांसदों ने राज्यसभा में धनखड़ के खिलाफ नोटिस दिया था, जिसमें पक्षपातपूर्ण व्यवहार का आरोप लगाया गया था।
हालांकि यह प्रस्ताव तकनीकी आधार पर खारिज कर दिया गया क्योंकि 14 दिन का नोटिस पीरियड पूरा नहीं किया गया था। उपसभापति हरिवंश ने इसे संवैधानिक संस्थानों की छवि धूमिल करने की कोशिश करार दिया था।
क्या है इस्तीफे के पीछे की असली वजह?
हालांकि धनखड़ ने स्वास्थ्य कारण बताए, लेकिन विपक्षी नेता जयराम रमेश ने कहा कि यह इस्तीफा “चौंकाने वाला और अकल्पनीय” है। उन्होंने इशारों में कहा कि इस फैसले के पीछे कुछ और गहराई हो सकती है, जिसे अभी सार्वजनिक नहीं किया गया है।
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