लॉर्ड्स टेस्ट के दूसरे दिन मैदान पर एक अजीब स्थिति पैदा हो गई, जब भारतीय कप्तान शुभमन गिल इस बात से नाराज़ दिखे कि मैच में केवल 10 ओवर पुरानी गेंद को बदलना पड़ा। गेंद हूप टेस्ट में फेल हो गई थी और अंपायरों ने नई गेंद लाने का आदेश दिया, लेकिन गिल को जो गेंद सौंपी गई वह अपेक्षाकृत पुरानी थी। इस पर गिल ने अंपायरों से बहस की, लेकिन नतीजा कुछ खास नहीं निकला।
इंग्लैंड को मिला फायदा, भारत ने दो बार गेंद बदली
गेंद बदलने के बाद जेमी स्मिथ और ब्रायडन कार्से ने पुरानी गेंद का फायदा उठाते हुए उपयोगी साझेदारी की। मात्र 48 गेंद बाद भारत को फिर से गेंद बदलनी पड़ी, क्योंकि दूसरी गेंद भी हूप टेस्ट में फेल हो गई। तीसरी गेंद मिलने के बाद भारत ने कोई और शिकायत नहीं की, लेकिन इस घटना ने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया — क्या ड्यूक बॉल टेस्ट क्रिकेट के लायक है?
ड्यूक गेंद की गुणवत्ता पर स्टुअर्ट ब्रॉड की भी नाराज़गी
पूर्व इंग्लिश पेसर स्टुअर्ट ब्रॉड पहले ही ड्यूक गेंद की घटती गुणवत्ता पर सवाल उठा चुके हैं। उन्होंने कहा, “गेंद कम से कम 80 ओवर चलनी चाहिए, 10 ओवर नहीं। ये पूरी तरह अस्वीकार्य है।” उन्होंने इस पर सख्त कदम उठाने की मांग की।
कहां से शुरू हुआ विवाद?
इस विवाद की शुरुआत एजबेस्टन टेस्ट से हुई, जिसमें भारत ने ऐतिहासिक जीत दर्ज की थी। मैच के बाद कप्तान शुभमन गिल और उप-कप्तान ऋषभ पंत ने ड्यूक बॉल की आलोचना करते हुए इसे “बेकार गुणवत्ता” वाली करार दिया।
क्यों जल्दी खराब हो रही है गेंद?
गेंद की सिलाई और लेदर क्वालिटी में गिरावट
नमी और बारिश की वजह से गेंद सॉफ्ट हो रही है
फ्लैट और कम घास वाली पिचें, जहां गेंद ज्यादा रगड़ खा रही है
गेंद के नरम होते ही बैटिंग आसान हो जाती है, बॉल की स्पीड कम और बाउंस घट जाता है
ड्यूक बनाम SG बनाम कुकाबुरा: क्या है अंतर?
ड्यूक बॉल: हाथ से सिलाई, सीम मूवमेंट ज्यादा, लेकिन जल्दी खराब होती है
SG बॉल: हाथ से सिली जाती है, स्पिनर्स को ज्यादा मदद
कुकाबुरा बॉल: मशीन से बनी, हार्ड बॉल, सीम मूवमेंट स्थिर
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