गाजा पट्टी में इजरायली हमलों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। 10 जुलाई की सुबह, एक दर्दनाक घटना में इलाज के लिए लाइन में खड़े 15 लोगों की जान चली गई, जिनमें 10 बच्चे और 5 वयस्क शामिल थे।
हमला उस वक्त हुआ जब लोग एक मेडिकल सेंटर के बाहर इलाज के लिए गेट खुलने का इंतज़ार कर रहे थे।
🏥 जिस क्लिनिक के पास बम गिरा, वो ‘प्रोजेक्ट होप’ का मेडिकल सेंटर था
यह हमला अमेरिकी एनजीओ ‘Project Hope’ द्वारा संचालित एक क्लिनिक के पास हुआ, जहां कुपोषण, संक्रमण और दूसरी बीमारियों का इलाज होता है।
दी गार्जियन की रिपोर्ट के अनुसार, एनजीओ के प्रमुख रबीह तुर्बे ने बताया कि इस क्लिनिक की लोकेशन इजरायली सेना को पहले ही दे दी गई थी, इसके बावजूद हमला किया गया।
इस हमले के बाद सेंटर पर इलाज कार्य को अगले आदेश तक बंद कर दिया गया है।
🧕 आंखों देखी बयान करती है इंसानियत की हार
मौके पर मौजूद 35 वर्षीय मोहम्मद अबू ओउदा ने भावुक होते हुए बताया:
“हमारी क्या गलती थी? हमारे बच्चों की क्या गलती थी? मैंने अपनी आंखों से देखा, एक मां अपने बच्चे को गले लगाए ज़मीन पर गिरी थी… दोनों ने पलभर में दम तोड़ दिया।”
यह बयान उस दर्द और बेबसी की झलक देता है, जो युद्ध की आग में फंसे आम लोग हर दिन झेल रहे हैं।
📈 24 घंटे में 82 लोगों की मौत
इजरायली हमलों में पिछले 24 घंटों में गाजा पट्टी में 82 लोगों की जान जा चुकी है।
इनमें बड़ी संख्या बच्चों और महिलाओं की है, जो बुनियादी सुविधाओं और इलाज की तलाश में मारे जा रहे हैं।
⚖️ अंतरराष्ट्रीय नियमों का उल्लंघन?
रबीह तुर्बे ने इस हमले को “अंतर्राष्ट्रीय मानवीय कानून का घोर उल्लंघन” बताया है।
उन्होंने कहा कि जब सेना को क्लिनिक की लोकेशन पहले से ही ज्ञात थी, तो फिर ऐसी निर्दोष जिंदगियों पर हमला क्यों किया गया?
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