दिल्ली विश्वविद्यालय (DU) में शिक्षकों के प्रमोशन की प्रक्रिया को लेकर लंबे समय से चल रही बहस अब खत्म हो गई है। विश्वविद्यालय की कार्यकारी परिषद (EC) की 1275वीं बैठक में एक नए प्रस्ताव को मंजूरी दी गई है, जिसके तहत अब शिक्षकों की वरिष्ठता उनकी जन्मतिथि के आधार पर तय की जाएगी।
📌 क्या है नया नियम?
डीयू के नए नियमों के मुताबिक, जब दो या अधिक शिक्षक समान शैक्षणिक योग्यताओं के साथ प्रमोशन के लिए पात्र होंगे, तो उनकी वरिष्ठता उम्र के आधार पर तय की जाएगी। यानी, जो शिक्षक ज्यादा उम्र का होगा, उसे वरिष्ठ माना जाएगा, और उसे पहले प्रमोशन मिलेगा।
अगर दो शिक्षकों की उम्र भी समान है, तो निर्णय एपीआई (Academic Performance Indicator) स्कोर के आधार पर किया जाएगा।
🧑🏫 प्रमोशन प्रक्रिया में पारदर्शिता लाने की कोशिश
डीयू में असिस्टेंट प्रोफेसर से एसोसिएट प्रोफेसर और प्रोफेसर पद पर प्रमोशन के दौरान वरिष्ठता तय करने के मानकों को लेकर लंबे समय से असमंजस और विवाद बना हुआ था। शिक्षकों और संघों ने बार-बार यह मुद्दा उठाया कि स्पष्ट नीति के अभाव में कई बार पक्षपात और भ्रम की स्थिति बन जाती है।
इन्हीं समस्याओं को ध्यान में रखते हुए डीयू ने प्रो. बलराम पाणी की अध्यक्षता में एक समिति का गठन किया था, जिसने विभिन्न कॉलेजों और विभागों की आपत्तियों व सुझावों को सुनने के बाद एक रिपोर्ट तैयार की। इस रिपोर्ट को ईसी की बैठक में रखा गया, जहां से इसे हरी झंडी मिल गई है।
🧾 अध्यादेश XI से नहीं होगा कोई समझौता
डीयू प्रशासन ने यह स्पष्ट किया है कि यह नया नियम अध्यादेश XI (11) में दिए गए मौजूदा प्रावधानों के साथ पूरी तरह संगत रहेगा और उनमें किसी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा।
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