हाल के वर्षों में अमेरिकी प्रशासन द्वारा लगाए गए ट्रंप टैरिफ ने दुनिया भर के निर्यातकों को चुनौती दी थी। हालांकि, भारत ने इस चुनौती का सामना करते हुए नई निर्यात रणनीति (Export Strategy) अपनाई, और इसके परिणाम स्वरूप निर्यात में बढ़ोतरी देखी गई।
विशेषज्ञों का कहना है कि भारत की यह रणनीति सिर्फ़ अमेरिकी बाजार पर निर्भरता कम करने तक ही सीमित नहीं रही, बल्कि नई मार्केट्स और वैल्यू एडेड प्रोडक्ट्स पर भी फोकस किया गया। इससे अमेरिका में लागू टैरिफ का असर अपेक्षा के अनुसार कम हुआ।
नई एक्सपोर्ट स्ट्रेटेजी के प्रमुख बिंदु
डाइवर्सिफिकेशन (Diversification): अमेरिकी बाजार के अलावा यूरोप, एशिया और अफ्रीका जैसे नए मार्केट्स में निर्यात बढ़ाया गया।
वैल्यू एडिशन (Value Addition): कृषि और मैन्युफैक्चरिंग उत्पादों में उच्च गुणवत्ता और ब्रांडिंग पर जोर।
डिजिटल ट्रेड प्लेटफॉर्म: छोटे और मीडियम व्यवसायों को वैश्विक स्तर पर पहुंचाने के लिए ई-कॉमर्स और डिजिटल मार्केटिंग का इस्तेमाल।
इनसेंटिव्स और सपोर्ट: सरकार ने निर्यातकों को सब्सिडी और टेक्निकल सपोर्ट प्रदान किया।
निर्यातकों की प्रतिक्रिया
भारतीय निर्यातक इस रणनीति को सफल और समयानुकूल मान रहे हैं। उनका कहना है कि नई रणनीति के कारण न केवल टैरिफ के दबाव को कम किया जा सका, बल्कि कंपिटिटिव एडवांटेज भी बढ़ाया गया।
विशेष रूप से टेक्सटाइल, फार्मास्यूटिकल और आईटी उत्पाद अब वैश्विक बाजार में अधिक प्रतिस्पर्धी बन गए हैं। छोटे और मीडियम व्यवसायों ने भी डिजिटल माध्यमों का उपयोग कर वैश्विक ग्राहक बेस तैयार किया है।
आर्थिक विशेषज्ञों का दृष्टिकोण
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत की नई एक्सपोर्ट रणनीति मौजूदा ग्लोबल ट्रेड वार के समय में बहुत ही असरदार साबित हुई। यह रणनीति न केवल आर्थिक स्थिरता लाने में सहायक रही, बल्कि भविष्य में वैश्विक व्यापार में भारत की स्थिति को मजबूत करने में भी मदद करेगी।
विशेषज्ञों ने कहा कि यदि भारत ने इस नीति को दीर्घकालिक और सतत रूप से लागू किया, तो यह निर्यात में स्थायी वृद्धि और रोजगार सृजन में महत्वपूर्ण योगदान देगा।
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