मोबाइल नंबर से हो सकता है बड़ा कांड, जानिए कैसे करते हैं हैकर्स साइबर हमला

आज के डिजिटल युग में मोबाइल नंबर केवल संपर्क का साधन नहीं रह गया है, बल्कि आपकी पहचान, बैंकिंग जानकारी और निजी डेटा तक की चाबी बन चुका है। विशेषज्ञों की मानें तो हैकर्स के लिए सिर्फ मोबाइल नंबर जानना ही किसी व्यक्ति की निजी जानकारी तक पहुंचने की पहली सीढ़ी बन चुका है। हाल ही में हुए कई साइबर अपराधों में यह सामने आया है कि अपराधियों ने सिर्फ मोबाइल नंबर के आधार पर लाखों रुपये की ठगी को अंजाम दिया।

क्या कर सकते हैं हैकर्स सिर्फ मोबाइल नंबर से?

साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि मोबाइल नंबर से निम्नलिखित कार्य किए जा सकते हैं:

स्पूफिंग कॉल्स और SMS: हैकर्स नंबर स्पूफिंग तकनीक से किसी सरकारी एजेंसी या बैंक का नंबर दिखाकर कॉल करते हैं और यूजर को फंसाते हैं।

OTP इंटरसेप्शन: यदि मोबाइल नंबर पहले से ट्रैक किया जा रहा हो, तो हैकर्स किसी भी ऑनलाइन लेन-देन के लिए भेजे गए OTP को भी इंटरसेप्ट कर सकते हैं।

व्हाट्सऐप/टेलीग्राम हैकिंग: मोबाइल नंबर से व्हाट्सऐप या अन्य मैसेजिंग ऐप में लॉगिन करने की कोशिश कर, ओटीपी के जरिए अकाउंट को एक्सेस किया जा सकता है।

सिम स्वैपिंग: धोखाधड़ी कर हैकर्स आपके नाम पर नया सिम निकलवा सकते हैं, जिससे आपके बैंक, UPI और सोशल मीडिया तक उनकी पहुंच बन जाती है।

मोबाइल नंबर लीक हो जाए तो क्या करें?

मोबाइल कंपनी को सूचित करें: यदि शक हो कि सिम क्लोन या सिम स्वैप हुआ है, तो तुरंत अपने टेलिकॉम प्रोवाइडर से संपर्क करें और नंबर ब्लॉक कराएं।

OTP आधारित सेवाओं में बदलाव करें: अपने बैंक, UPI और अन्य ऐप्स की सेटिंग्स की जांच करें और जरूरत हो तो नंबर अपडेट करें।

पासवर्ड और PIN बदलें: ईमेल, सोशल मीडिया और बैंकिंग सेवाओं के पासवर्ड तुरंत बदल दें।

साइबर सेल में शिकायत दर्ज करें: किसी भी प्रकार की धोखाधड़ी की आशंका हो तो तुरंत स्थानीय साइबर क्राइम सेल से संपर्क करें।

फ्रॉड अलर्ट ऐप्स इंस्टॉल करें: Truecaller जैसे विश्वसनीय ऐप्स की मदद से स्पैम कॉल्स और SMS की पहचान की जा सकती है।

कैसे बचें ऐसे खतरों से?

कभी भी अनजान लिंक पर क्लिक न करें।

पब्लिक फोरम या सोशल मीडिया पर अपना मोबाइल नंबर साझा करने से बचें।

टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन को हमेशा सक्रिय रखें।

समय-समय पर अपने मोबाइल ऐप्स और फोन की सुरक्षा सेटिंग्स की जांच करते रहें।

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