बीपी कंट्रोल में रखना है तो इन 8 आदतों को कहें अलविदा

हाई ब्लड प्रेशर यानी उच्च रक्तचाप एक ऐसी समस्या बन चुकी है जो बिना किसी शोर-शराबे के शरीर को भीतर से नुकसान पहुंचाती है। इसे “साइलेंट किलर” इसलिए कहा जाता है क्योंकि इसके लक्षण देर से सामने आते हैं, लेकिन नुकसान पहले से होता रहता है। विशेषज्ञों के अनुसार, भारत में हर तीसरा व्यक्ति ब्लड प्रेशर की समस्या से जूझ रहा है।

अगर समय रहते इसे न रोका गया, तो यह हृदय रोग, किडनी फेलियर और स्ट्रोक जैसे गंभीर परिणामों का कारण बन सकता है। लेकिन इस खतरे से बचना भी संभव है, बशर्ते हम उन आठ आदतों या कारणों को जानें और समय रहते सुधार करें, जो रक्तचाप को तेजी से बढ़ाने का काम कर रही हैं।

अधिक नमक का सेवन

नमक में मौजूद सोडियम ब्लड प्रेशर को सबसे अधिक प्रभावित करता है। प्रोसेस्ड फूड, चिप्स, अचार, नमकीन आदि में अत्यधिक नमक पाया जाता है जो धीरे-धीरे बीपी को बढ़ा देता है।

शारीरिक गतिविधि की कमी

बैठे-बैठे काम करना और व्यायाम से दूरी बनाना दिल और धमनियों पर दबाव बढ़ाता है, जिससे बीपी असंतुलित होता है।

जंक और तैलीय भोजन

फास्ट फूड, तली-भुनी चीजें और ट्रांस फैट्स से भरपूर डाइट न सिर्फ वजन बढ़ाती है, बल्कि रक्तचाप को भी तेजी से ऊपर ले जाती है।

मानसिक तनाव और चिंता

लगातार टेंशन में रहना शरीर में कोर्टिसोल हार्मोन को बढ़ाता है, जो ब्लड प्रेशर को असंतुलित करता है।

आनुवांशिक कारण (Genetics)

अगर परिवार में किसी को हाई बीपी है, तो आपको भी यह खतरा अधिक हो सकता है। इसलिए नियमित जांच आवश्यक है।

धूम्रपान और शराब का सेवन

स्मोकिंग और अधिक मात्रा में अल्कोहल लेना रक्त धमनियों को सिकोड़ता है, जिससे ब्लड प्रेशर में बढ़ोतरी होती है।

नींद की कमी

7-8 घंटे की नींद न लेना शरीर को रेस्ट से वंचित करता है और दिल पर अनावश्यक दबाव डालता है।

नियमित जांच न कराना

कई बार लोग बीपी की जांच तभी कराते हैं जब लक्षण दिखते हैं। लेकिन तब तक देर हो चुकी होती है। रेगुलर मॉनिटरिंग से बीपी को कंट्रोल में रखना आसान होता है।

कैसे रखें बीपी को नियंत्रण में?

रोजाना 30 मिनट वॉक करें

भोजन में नमक और तले-भुने खाद्य कम करें

ध्यान, योग और प्राणायाम अपनाएं

धूम्रपान और शराब से दूरी बनाएं

नींद पूरी लें और तनाव से बचें

6 महीने में एक बार बीपी की जांच अवश्य कराएं

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