कांग्रेस ने अडाणी समूह के खिलाफ लगे आरोपों की संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) से जांच की मांग बुधवार को फिर उठाई और कहा कि अगर सरकार के पास छिपाने के लिए कुछ नहीं है तो जेपीसी के गठन की घोषणा के साथ संसद के नए भवन में कामकाज का आगाज होना चाहिए। पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने एक खबर का हवाला भी दिया जिसमें कहा गया है कि अडाणी समूह से संबंधित एक पूर्व कांट्रैक्टर ने उच्चतम न्यायालय से इस समूह से संबंधित मामले में हस्तक्षेप का आग्रह किया है।
अमेरिकी कंपनी ‘हिंडनबर्ग रिसर्च’ द्वारा अडाणी समूह के खिलाफ ‘अनियमितताओं’ और स्टॉक मूल्य में हेरफेर का आरोप लगए जाने के बाद से कांग्रेस इस कारोबारी समूह पर निरंतर हमले और जेपीसी से जांच की मांग कर रही है। अडाणी समूह ने हिंडनबर्ग की रिपोर्ट में लगाए गए सभी आरोपों से इनकार किया था और उसका कहना था कि उसकी ओर से कोई गलत काम नहीं किया गया है।
रमेश ने बुधवार को ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, ”कुछ दिन पहले अडाणी महाघोटाले की सही ढंग से जांच करने में सेबी की विफलता पर विस्तृत दस्तावेज के साथ उच्चतम न्यायालय में एक जनहित याचिका दायर की गई। अब अडाणी से संबंधित एक पूर्व कांट्रैक्टर करोड़ों निवेशकों के हित में इस मामले में हस्तक्षेप करने के लिए उच्चतम न्यायालय से अनुमति चाहता है। इस कांट्रैक्टर का कहना है कि उसके पास अंदरूनी जानकारी है।” उन्होंने कहा, ”यह सब जेपीसी से जांच की मांग को मजबूती देता है। यदि प्रधानमंत्री के पास वास्तव में छिपाने के लिए कुछ नहीं है तो जेपीसी की घोषणा के साथ नए संसद भवन में कामकाज की शुरुआत हो सकती है।”
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