प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने संसद और विधानसभाओं में महिलाओं के लिए आरक्षण के प्रावधान वाले कानून की मंजूरी को भारतीय लोकतंत्र की संकल्प शक्ति का एक उदाहरण बताते हुए कहा है कि इससे देश को विकसित राष्ट्र बनाने में मदद मिलेगी।
श्री मोदी अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम- मन की बात में रविवार को संविधान दिवस को बधाई देते हुए कहा कि भारत की संविधान सभा के मनोनीत सदस्यों में 15 महिलाएं थीं। इनमें से एक हंसा महता जी ने महिलाओं के अधिकार और न्याय को आवाज बुलंद की थी। इस दौर में भारत उन कुछ देशों में था, जहां महिलाओं को संविधान से मतदान का अधिकार दिया गया।
उन्होंने कहा, “अब भारत की संसद ने नारी शक्ति वंदन अधिनियम को पास किया है। यह अधिनियम हमारी लोकतंत्र की संकल्प शक्ति का उदाहरण है। यह विकसित भारत के हमारे संकल्प को गति देने के लिए उतना ही सहायक होगा।”प्रधानमंत्री ने कहा “राष्ट्र निर्माण में जब सबका साथ होता है तभी सबका विकास हो पाता है। मुझे संतोष है कि संविधान निर्माताओं के उसी दूर दृष्टि का पालन करते हुए, अब भारत की संसद में ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ को पास किया है।”
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में देश में डिजिटल तरीके से भुगतान के रुझान में तेजी युवाओं में प्रौद्योगिकी के सहारे नए विचारों पर काम करने और नवाचार की तरफ आकर्षण तथा स्वच्छता के प्रति जनता की सोच में बदलाव जैसे मुद्दों को भी रेखांकित किया।उन्होंने जल संरक्षण के महत्व का मुद्दा उठाते हुए कहा कि 21वीं सदी की बहुत बड़ी चुनौतियों में से एक है जल सुरक्षा की चुनौती।
प्रधानमंत्री ने कहा कि जल का संरक्षण करना जीवन को बचाने से कम नहीं है। उन्होंने इसके लिए सामूहिकता की भावना से काम करने की आवश्यकता पर बल दिया और कहा कि मिल-जुलकर काम करने से ही इसमें सफलता मिलेगी। श्री मोदी ने इस दिशा में हर जिले में अमृत सरोवर बनाने की केंद्र की योजना का उल्लेख किया।
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