थायराइड एक हार्मोनल समस्या है जो थायराइड ग्लैंड द्वारा निर्मित हार्मोन की असंतुलित मात्रा के कारण होती है। यह ग्लैंड गले के सामने वाले हिस्से में स्थित होती है और शरीर की मेटाबॉलिज्म, ऊर्जा स्तर, वजन और हार्ट रेट को नियंत्रित करती है। थायराइड के दो मुख्य प्रकार होते हैं:
हाइपोथायराइडिज़्म (Hypothyroidism): थायराइड हार्मोन की कमी
हाइपरथायराइडिज़्म (Hyperthyroidism): थायराइड हार्मोन की अधिकता
आज हम जानेंगे कि थायराइड क्यों बढ़ता है, इसके मुख्य कारण क्या हैं और इसे कैसे बचाव और इलाज के जरिए नियंत्रित किया जा सकता है।
थायराइड बढ़ने के मुख्य कारण
- आयोडीन की कमी या अधिकता
थायराइड हार्मोन बनाने के लिए आयोडीन जरूरी है।
कमी या अत्यधिक सेवन दोनों थायराइड को प्रभावित कर सकते हैं।
समुद्री भोजन, अंडा और दूध में आयोडीन की पर्याप्त मात्रा होती है।
- ऑटोइम्यून डिसऑर्डर
जब शरीर की इम्यून सिस्टम गलती से थायराइड ग्लैंड को नुकसान पहुंचाती है।
उदाहरण: हाशिमोटो थायराइडिटिस (Hypothyroidism) और ग्रेव्स डिजीज (Hyperthyroidism)।
- अनियमित खान-पान और पोषण की कमी
ज्यादा जंक फूड, प्रोसेस्ड फूड और फाइबर की कमी
पर्याप्त प्रोटीन और मिनरल्स न लेना
- तनाव और मानसिक दबाव
लंबे समय तक तनाव, नींद की कमी और अत्यधिक चिंता थायराइड हार्मोन को असंतुलित कर सकते हैं।
- जेनेटिक फैक्टर
परिवार में थायराइड की समस्या होना
महिला में पुरुषों की तुलना में अधिक आम
थायराइड के सामान्य लक्षण
वजन अचानक बढ़ना या घटना
थकान और कमजोरी
बाल झड़ना या त्वचा का रूखापन
ठंड या गर्मी सहन न करना
मूड स्विंग और डिप्रेशन
गले में सूजन या गांठ
थायराइड बचाव और आसान उपाय
- संतुलित आहार अपनाएं
आयोडीन युक्त आहार: समुद्री मछली, अंडा, दूध
सेलेनियम: अखरोट, मूंगफली, बीन्स
जिंक: कद्दू के बीज, दालें
फाइबर और प्रोटीन से भरपूर खाना
- तनाव कम करें
रोज़ योग, ध्यान और प्राणायाम करें
पर्याप्त नींद (7–8 घंटे) लें
- नियमित व्यायाम
चलना, साइकिल चलाना, तैराकी
मेटाबॉलिज्म और हार्मोन संतुलन के लिए जरूरी
- नियमित चेकअप
थायराइड हार्मोन (TSH, T3, T4) की जांच
डॉक्टर की सलाह अनुसार दवा या सप्लीमेंट
- प्रोसेस्ड फूड और अत्यधिक चीनी से बचें
यह हार्मोन संतुलन बिगाड़ सकते हैं और वजन बढ़ा सकते हैं
थायराइड की समस्या बढ़ती जा रही है, लेकिन सही जानकारी, संतुलित आहार, नियमित व्यायाम और मानसिक संतुलन से इसे नियंत्रित किया जा सकता है। अगर आप समय पर लक्षण पहचान लें और डॉक्टर से चेकअप कराएं, तो हाइपो या हाइपरथायराइड दोनों का प्रभाव कम किया जा सकता है।
Navyug Sandesh Hindi Newspaper, Latest News, Findings & Fact Check