विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने कोरोना वायरस के ‘जेएन.1’ स्वरूप के तेजी से बढ़ते मामलों के बीच इसे ‘वैरिएंट ऑफ इंटरेस्ट’ करार दिया है। डब्यूएचओ ने साथ ही कहा कि इससे वैश्विक जनस्वास्थ्य के लिए ज्यादा खतरा नहीं है।
विश्व स्वास्थ्य निकाय ने मंगलवार को कहा कि 2020 के अंत में वैश्विक सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए जोखिम पैदा करने वाले स्वरूपों के सामने आने से बाद से डब्ल्यूएचओ ने हल्के स्वरूप को ‘वैरिएंट ऑफ इंटरेस्ट’ तथा गंभीर स्वरूप को ‘वैरिएंट ऑफ कंसर्न’ के रूप में वर्गीकृत करना शुरू किया है।हाल में ‘जेएन.1’ स्वरूप के मामले कई देशों में सामने आए हैं और दुनिया में इस स्वरूप के मामले बढ़ रहे हैं। भारत में भी इस स्वरूप का मामला सामने आया है।
डब्ल्यूएचओ के अनुसार, यह अब ‘ग्लोबल इनिशिएटिव ऑन शेयरिंग ऑल इन्फ्लुएंजा डेटा’ (जीआईएसएआईडी) से जुड़े बीए.2.86 वंशानुक्रम (लीनिएज) से संबंधित है।इसने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ”तेजी से इसके मामले बढ़ने के कारण डब्ल्यूएचओ ‘जेएन.1’ को मूल वंश बीए.2.86 से अलग ‘वैरिएंट ऑफ इंटरेस्ट’ के तौर पर वर्गीकृत कर रहा है।”
भारत के स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के अनुसार, ‘जेएन.1’ के मामले अमेरिका, चीन, सिंगापुर और भारत में पाए गए हैं। चीन में इस स्वरूप के सात मामले सामने आए हैं।देश में कोरोना वायरस संक्रमण के मामले बढ़ने के बीच केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मांडविया ने बुधवार को स्वास्थ्य प्रतिष्ठानों की तैयारियों का जायजा लिया और साथ ही राज्यों से सतर्कता बरतने एवं निगरानी बढ़ाने की अपील की।
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