आधुनिक जीवनशैली, घर के भीतर रहना और धूप से दूरी ने महिलाओं में विटामिन D की कमी की समस्या को तेजी से बढ़ा दिया है। चिकित्सकों के मुताबिक, भारत में हर तीन में से दो महिलाएं इस पोषक तत्व की कमी से जूझ रही हैं, जिसका असर उनकी हड्डियों, हार्मोनल संतुलन और मानसिक स्वास्थ्य तक पर पड़ता है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर समय रहते इसके लक्षण पहचान लिए जाएं, तो गंभीर बीमारियों से बचाव संभव है।
क्यों जरूरी है विटामिन D?
विटामिन D शरीर में कैल्शियम के अवशोषण के लिए जिम्मेदार होता है। यह न सिर्फ हड्डियों को मजबूत रखता है बल्कि इम्यून सिस्टम, हार्मोनल हेल्थ और मानसिक स्थिरता में भी अहम भूमिका निभाता है। इसकी कमी से शरीर धीरे-धीरे कमजोर पड़ने लगता है और कई समस्याएं एक साथ उभर आती हैं।
महिलाओं में दिखने वाले 8 प्रमुख लक्षण
लगातार थकान और कमजोरी – शरीर में पर्याप्त ऊर्जा न रहना, थोड़े से काम के बाद थक जाना, विटामिन D की कमी का शुरुआती संकेत हो सकता है।
हड्डियों और जोड़ों में दर्द – यह कमी कैल्शियम के अवशोषण को प्रभावित करती है, जिससे कमर, घुटनों और रीढ़ में दर्द होता है।
मूड स्विंग और डिप्रेशन – यह विटामिन “हैप्पी हार्मोन” सेरोटोनिन के निर्माण में मदद करता है। इसकी कमी से मूड अस्थिर और अवसाद की समस्या बढ़ सकती है।
बाल झड़ना और त्वचा का रूखापन – बालों का अत्यधिक झड़ना और स्किन का निखार खोना, शरीर में विटामिन D के निम्न स्तर का संकेत हो सकता है।
कमज़ोर इम्यून सिस्टम – बार-बार सर्दी-जुकाम या संक्रमण होना भी इस पोषक तत्व की कमी का परिणाम हो सकता है।
नींद की कमी – विटामिन D शरीर की जैविक घड़ी (सर्कैडियन रिदम) को प्रभावित करता है, जिससे नींद में बाधा आ सकती है।
पीठ और कंधों में अकड़न – लंबे समय तक बैठे रहने या सुबह उठते समय कठोरता महसूस होना इस कमी का एक सामान्य लक्षण है।
माहवारी अनियमितता या हार्मोनल असंतुलन – महिलाओं में यह समस्या विटामिन D की कमी से जुड़ी पाई गई है, क्योंकि यह हार्मोनल क्रियाओं को प्रभावित करती है।
कौन हैं सबसे ज्यादा खतरे में?
डॉक्टरों के अनुसार, जिन महिलाओं का ज़्यादातर समय घर के अंदर बीतता है, जो धूप से बचती हैं या सर्दियों में ज़्यादा ढके हुए कपड़े पहनती हैं, उनमें यह कमी आम होती है। इसके अलावा, गर्भवती महिलाएं, स्तनपान कराने वाली माताएं और 40 वर्ष से अधिक आयु की महिलाएं इसके प्रति अधिक संवेदनशील होती हैं।
कैसे करें बचाव
विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि रोजाना सुबह 15 से 20 मिनट धूप में रहना सबसे प्राकृतिक उपाय है। इसके अलावा, अंडे, फोर्टिफाइड दूध, मछली और मशरूम जैसे आहार को डाइट में शामिल करना चाहिए। जरूरत पड़ने पर डॉक्टर की सलाह से विटामिन D सप्लीमेंट भी लिया जा सकता है।
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