केंद्रीय गृह मंत्री **अमित शाह** ने बुधवार, 25 मार्च, 2026 को **गुजरात समान नागरिक संहिता (UCC) विधेयक, 2026** के पारित होने का स्वागत किया। उन्होंने इसे समानता की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम बताया और कहा कि देश का शासन “सभी नागरिकों के लिए समान कानूनों” के आधार पर चलना चाहिए, न कि तुष्टीकरण के आधार पर।
X पर एक पोस्ट में शाह ने कहा: “हमारा विश्वास स्पष्ट है — देश तुष्टीकरण के आधार पर नहीं, बल्कि सभी नागरिकों के लिए समान कानूनों के सिद्धांत पर चलना चाहिए। यह हमारी प्राथमिकता भी है और हमारा संकल्प भी।” उन्होंने UCC को भारतीय जनता पार्टी (BJP) की स्थापना के समय से ही एक “मूल प्रतिबद्धता” बताया और गुजरात के मुख्यमंत्री **भूपेंद्र पटेल** तथा विधेयक का समर्थन करने वाले विधायकों को बधाई दी।
गुजरात विधानसभा ने **मंगलवार, 24 मार्च, 2026** को सात घंटे से अधिक चली लंबी बहस के बाद इस विधेयक को पारित कर दिया। इस तरह गुजरात **उत्तराखंड** (जिसने फरवरी 2024 में अपना UCC लागू किया था) के बाद **दूसरा राज्य** बन गया, जिसने सभी धर्मों के व्यक्तिगत कानूनों को नियंत्रित करने वाला एक समान कानूनी ढांचा अपनाया है। यह कानून गुजरात के सभी निवासियों पर लागू होता है, जिसमें अनुसूचित जनजातियों को छूट दी गई है।
**गुजरात UCC विधेयक 2026 के मुख्य प्रावधान**
– सभी विवाहों और तलाक का **अनिवार्य पंजीकरण**।
– तलाक के लिए समान आधार और प्रक्रियाएं; न्यायिक प्रक्रिया से बाहर (extra-judicial) तलाक पर रोक।
– **द्विविवाह/बहुविवाह पर प्रतिबंध** (एकविवाह अनिवार्य); इसका उल्लंघन करने पर सात साल तक की कैद की सजा हो सकती है।
– यदि पहचान छिपाई गई हो या धोखाधड़ी/दबाव के माध्यम से विवाह किया गया हो, तो ऐसे विवाहों को अमान्य घोषित किया जाएगा।
– बेटियों और बेटों के लिए विरासत में समान अधिकार; महिलाओं के लिए भरण-पोषण के बेहतर अधिकार, जो व्यक्तिगत कानूनों से स्वतंत्र होंगे।
– लिव-इन संबंधों का जिला रजिस्ट्रार के पास **अनिवार्य पंजीकरण** (पंजीकरण न कराने पर तीन महीने तक की कैद या ₹10,000 का जुर्माना हो सकता है)। संबंध समाप्त होने की सूचना देना भी अनिवार्य है। लिव-इन संबंधों में रहने वाली महिलाएं भरण-पोषण की हकदार होंगी; ऐसे संबंधों से जन्मे बच्चों को वैध संतान माना जाएगा।
सरकार ने इस विधेयक को लैंगिक न्याय, राष्ट्रीय एकता और कानूनी समानता को बढ़ावा देने वाला एक उपाय बताया है। कांग्रेस सहित विपक्षी दलों ने बहस के दौरान इसका विरोध किया और तर्क दिया कि यह व्यक्तिगत स्वतंत्रता और धार्मिक अधिकारों का उल्लंघन करता है।
इस घटनाक्रम के साथ, BJP-शासित राज्य संविधान के अनुच्छेद 44 में परिकल्पित ‘समान नागरिक संहिता’ (UCC) के प्रति अपनी पुरानी प्रतिबद्धता को आगे बढ़ा रहे हैं। गुजरात UCC विधेयक अब लागू होने से पहले राज्यपाल की मंज़ूरी का इंतज़ार कर रहा है। (शब्द संख्या: 298)
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