सर्वोच्च न्यायालय ने कोलकाता में प्रवर्तन निदेशालय की जांच के दौरान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के कथित हस्तक्षेप पर कड़ी टिप्पणी की है। न्यायालय ने चेतावनी दी है कि कोई भी मुख्यमंत्री जांच प्रक्रिया में हस्तक्षेप करता है तो लोकतंत्र खतरे में पड़ सकता है। न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार मिश्रा और न्यायमूर्ति एन.वी. अंजारिया की पीठ ने कहा कि इस मुद्दे को केवल केंद्र और राज्य के बीच का विवाद नहीं माना जा सकता, बल्कि इसे संवैधानिक पद पर आसीन व्यक्ति के कृत्य के रूप में देखा जाना चाहिए।
न्यायालय, प्रवर्तन निदेशालय की उस याचिका पर सुनवाई कर रहा था जिसमें पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और अधिकारियों पर धनशोधन से जुड़े एक मामले की जांच के दौरान हस्तक्षेप करने का आरोप लगाया गया था।
पीठ ने कहा कि सुनवाई के दौरान कई निर्णयों का हवाला दिया गया, जिनमें 1973 का ऐतिहासिक केशवानंद भारती फैसला भी शामिल है, जिसमें संविधान के मूल ढांचे का सिद्धांत प्रतिपादित किया गया था। न्यायालय ने मामले को उच्च पीठ के पास भेजने की दलीलों को खारिज करते हुए कहा कि वह अनुच्छेद 32 के अंतर्गत याचिका की स्वीकार्यता पर फैसला करेगी। पीठ ने स्थिति को असाधारण बताते हुए ऐसे मामलों से निपटते समय जमीनी हकीकतों पर विचार करने की आवश्यकता पर जोर दिया। सुनवाई कल भी जारी रहेगी।
Navyug Sandesh Hindi Newspaper, Latest News, Findings & Fact Check